September 13, 2026

शिवपुरी। स्वच्छ भारत अभियान के दावों के बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र शिवपुरी से स्वच्छता व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। नगर पालिका के सफाई कर्मचारी अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 7 दिनों से हड़ताल पर हैं। सफाईकर्मियों के काम बंद करने से शहर की गलियों, सड़कों और चौराहों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लग गए हैं। गंदगी और बदबू के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

7 दिन की हड़ताल से शहर में जगह-जगह कचरा

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। नियमित कचरा उठाव और सफाई नहीं होने के कारण कई इलाकों में कचरा जमा हो गया है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर बढ़ते जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदगी के कारण बदबू फैल रही है और आने वाले दिनों में यदि स्थिति नहीं सुधरी तो संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

11 सूत्रीय मांगों पर अड़े सफाईकर्मी

सफाई कर्मचारी अपनी सभी 11 मांगों के समाधान की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी मनोज ने शहरवासियों से हड़ताल में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जिस दिन उनकी मांगें पूरी हो जाएंगी, उसके 24 घंटे के भीतर शहर का पूरा कचरा साफ कर दिया जाएगा।

कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं होने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

नगर पालिका का दावा- 8 मांगें मानीं

वहीं नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों की 11 में से 8 मांगें मान ली गई हैं। नगर पालिका सीएमओ यशवंत राठौर ने बताया कि शेष तीन मांगों के लिए प्रस्ताव तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

सीएमओ के मुताबिक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में विनियमितीकरण, नियमितीकरण और पदोन्नति शामिल हैं। इन मांगों को तत्काल पूरा करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।

प्रशासन के सामने चुनौती, सबसे ज्यादा परेशान जनता

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और नगर में बढ़ती गंदगी के बीच अब सबसे बड़ी परेशानी आम लोगों को उठानी पड़ रही है। शहर में कचरे के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं और सफाई व्यवस्था प्रभावित है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि हड़ताल लंबी चली और गंदगी के कारण शहर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ीं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? नगर पालिका प्रशासन, जिला प्रशासन या स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय होगी?

स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल

शिवपुरी की मौजूदा स्थिति ने स्वच्छता अभियान के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सफाई व्यवस्था ठप होने से शहर की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब प्रशासन के सामने कर्मचारियों की मांगों का समाधान करने के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाने की चुनौती है।

यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी तो आने वाले दिनों में शहर में कचरे की समस्या और गंभीर हो सकती है।

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