बस्तर। बस्तर संभाग में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद अब भौतिक सत्यापन में सामने आई कमी ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। संभाग के सात जिलों में खरीदे गए धान के भौतिक सत्यापन के दौरान करीब 28 हजार 244 मीट्रिक टन धान कम पाया गया है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 89 करोड़ 30 लाख रुपये बताई जा रही है।
अब इस कमी की भरपाई की जिम्मेदारी धान खरीदी समितियों के प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों पर डाली जा रही है। जिला सहकारी बैंक की ओर से संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर बकाया राशि जमा करने के लिए तीन महीने का समय दिए जाने की बात सामने आई है। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर FIR दर्ज कराने की चेतावनी भी दी जा रही है।

382 खरीदी केंद्रों में हुई थी 13.74 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी
जानकारी के मुताबिक बस्तर संभाग के सात जिलों के 382 धान खरीदी केंद्रों में करीब 13 लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इसमें से मिलर्स करीब 13 लाख 46 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव कर चुके हैं।
धान के उठाव और भौतिक सत्यापन के बाद करीब 28 हजार 244 मीट्रिक टन का अंतर सामने आया। अब प्रशासनिक स्तर पर इस शॉर्टेज की जिम्मेदारी तय करने और राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई है।
कांकेर में सबसे ज्यादा धान का शॉर्टेज
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग जिलों में धान की कमी इस प्रकार बताई गई है—
- कांकेर: 13,281 मीट्रिक टन
- कोंडागांव: 6,642 मीट्रिक टन
- बस्तर: 4,687 मीट्रिक टन
- बीजापुर: 2,131 मीट्रिक टन
- सुकमा: 1,501 मीट्रिक टन
इन आंकड़ों के आधार पर सबसे ज्यादा कमी कांकेर जिले में बताई जा रही है।
समितियों से 89 करोड़ की वसूली की तैयारी
अधिकारियों के मुताबिक धान के शॉर्टेज की राशि समितियों से वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित समिति प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने के लिए समय दिया जा रहा है।
नोटिस में निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर आगे कानूनी कार्रवाई और FIR की चेतावनी दिए जाने की बात कही गई है।
समिति प्रबंधकों ने उठाए सवाल
वहीं समिति प्रबंधकों का कहना है कि धान का समय पर उठाव नहीं होना इस स्थिति की प्रमुख वजहों में से एक है। उनका तर्क है कि संग्रहण केंद्रों और मिलर्स को शॉर्टेज में निर्धारित छूट दी जाती है, तो धान खरीदी समितियों को भी ऐसी राहत मिलनी चाहिए।
समिति प्रबंधकों ने धान में होने वाली सुखत को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि चावल में सुखत का प्रावधान है तो धान खरीदी के दौरान होने वाली प्राकृतिक कमी के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए।
तीन महीने में तय होगा आगे क्या होगा
बस्तर संभाग में अब मामला सिर्फ धान के शॉर्टेज तक सीमित नहीं रह गया है। करीब 89 करोड़ 30 लाख रुपये की अनुमानित कमी की भरपाई और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
आने वाले तीन महीनों में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित समितियां निर्धारित राशि जमा करती हैं या फिर मामला FIR और आगे की कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता है। वहीं समिति प्रबंधकों की ओर से उठाए गए शॉर्टेज और सुखत संबंधी सवालों पर प्रशासन की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।