गरियाबंद। आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतों पर ब्लॉक और जिला स्तर पर होने वाली जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि गंभीर शिकायतों में भी जांच के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। इसी तरह की शिकायतों के बाद लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष और सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन जांच के लिए जनपद स्तर पर गठित समितियों की रिपोर्ट को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
ताजा मामला मुड़ागांव ग्राम पंचायत का है। यहां रहने वाले भाजयुमो के तत्कालीन जिला अध्यक्ष हेमंत नागेश ने अपने गृह ग्राम में कथित आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत जून में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की थी। शिकायत की जांच के लिए आरएसएस एसडीओ गोरे लाल पैकरा के नेतृत्व में टीम गठित की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं, लेकिन अंतिम प्रतिवेदन में उनका अपेक्षित उल्लेख नहीं किया गया और कार्रवाई सीमित कर दी गई।

15 लाख से ज्यादा की अनियमितता का आरोप, 3.22 लाख की रिकवरी
शिकायतकर्ता हेमंत नागेश के मुताबिक, ग्राम पंचायत ने 15वें वित्त आयोग की राशि से सड़क सौंदर्यीकरण, सफाई और बोरवेल खनन के नाम पर 25 लाख रुपये से अधिक का आहरण किया। आरोप है कि इसके लिए झाखरपारा स्थित निधि ट्रेडर्स के बिल समेत कई दस्तावेजों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया और निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया गया।
नागेश का आरोप है कि एक ही सड़क का दो बार सौंदर्यीकरण दर्शाकर 15 लाख रुपये से अधिक की राशि में अनियमितता की गई। उनका कहना है कि जांच टीम के सामने आरोपों को प्रमाणित करने के लिए उन्होंने 128 साक्ष्य प्रस्तुत किए। टीम ने मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन भी किया।
शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आने के बावजूद उनका पूरा उल्लेख जांच प्रतिवेदन में नहीं किया गया। इसके बजाय सरपंच और सचिव के खिलाफ करीब 3.22 लाख रुपये की रिकवरी निर्धारित की गई।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि राशि का भुगतान तकनीकी सहायक के मूल्यांकन के आधार पर हुआ, जबकि बिल प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की थी। वहीं जिस एसडीओ के स्तर पर काम का स्थापन होने की बात कही जा रही है, उसी विभागीय अधिकारी को जांच टीम का नेतृत्व सौंपे जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
नागेश का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में वास्तविक गड़बड़ियों और उनके लिए जिम्मेदार लोगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई और मामूली राशि की वसूली के साथ मामले का निराकरण कर दिया गया।
चार अन्य पंचायतों की शिकायतों पर भी सवाल
सीएम पोर्टल के जरिए ब्लॉक की अन्य पंचायतों से जुड़ी शिकायतों की जांच को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने असंतोष जताया है।
कुम्हड़ाई खुर्द में सीसी रोड निर्माण में कथित गड़बड़ी की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद गरियाबंद से आरईएस के ईई ने जांच की। शिकायतकर्ता का दावा है कि शिकायत सही पाए जाने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसी तरह कुल्हाड़ी कला में पूर्व सरपंच और सचिव के खिलाफ करीब 6.57 लाख रुपये के गबन के आरोप लगाए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, दस्तावेजों से आरोपों की पुष्टि होने के बावजूद उनकी मांग के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई।
मोखागुड़ा पंचायत में मनरेगा कार्य में कथित अनियमितता और करलागुड़ा पंचायत में मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन से खुदाई कराने की शिकायत भी सामने आई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जांच टीम के सामने दस्तावेज और अन्य प्रमाण प्रस्तुत किए, लेकिन अंतिम रिपोर्ट में शिकायतों का अपेक्षित निराकरण नहीं हुआ।
शिकायतकर्ता असंतुष्ट तो दोबारा जांच का विकल्प : जनपद CEO
मामले में देवभोग जनपद CEO जगेंद्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री पोर्टल से प्राप्त शिकायतों की जांच गंभीरता से कराई जाती है। उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायतकर्ता जांच या निराकरण से संतुष्ट नहीं है, तो वह दोबारा जिला पंचायत या कलेक्टर के समक्ष जांच की मांग कर सकता है।
अब मुड़ागांव सहित अन्य पंचायतों की शिकायतों में लगाए गए आरोपों और जांच रिपोर्ट के बीच के अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि यदि जांच में वास्तव में आर्थिक अनियमितता प्रमाणित हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।