ग्वालियर। मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से योजना के सभी हितग्राहियों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि योजना से प्रभावित लाभार्थियों को मामले में आवश्यक पक्षकार बनाया जा सके। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल योजना बंद करने या महिलाओं को मिलने वाली मासिक किस्त रोकने का कोई आदेश नहीं दिया है।

युगलपीठ ने की मामले की सुनवाई
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। ग्वालियर निवासी सुधा दुबे की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा ने याचिका दायर की है।
याचिका में लाड़ली बहना योजना के तहत होने वाले खर्च, लाभार्थियों की संख्या, राज्य पर पड़ने वाले वित्तीय दायित्व और योजना के जरिए महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किए जाने की मांग की गई है।
सरकार के पास है सभी हितग्राहियों का विवरण
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई कि योजना के सभी हितग्राहियों को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर अदालत ने कहा कि इन हितग्राहियों का पूरा विवरण राज्य सरकार के पास उपलब्ध है।
हाईकोर्ट ने सरकार को यह जानकारी याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यक लाभार्थियों को मामले में पक्षकार बनाया जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में हितग्राहियों को नोटिस की तामील कराने का पूरा भार अकेले याचिकाकर्ता पर नहीं डाला जा सकता।
हिंदी अनुवाद के साथ नोटिस पहुंचाने के निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को याचिका का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराने और संबंधित हितग्राहियों तक नोटिस पहुंचाने की प्रक्रिया में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान राज्य के अधिवक्ता ने प्रारंभिक आपत्ति वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
इसके बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए। कोर्ट ने प्रक्रिया शुल्क तीन कार्यदिवस के भीतर जमा कराने और इसके बाद मामले को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
योजना बंद करने या किस्त रोकने का आदेश नहीं
हाईकोर्ट के इस आदेश को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने लाड़ली बहना योजना को बंद करने या मासिक भुगतान रोकने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है। योजना की वैधता पर भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
यानी केवल याचिका पर सुनवाई और सरकार को नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि लाभार्थियों की अगली किस्त रुक गई है। फिलहाल मामला नोटिस, रिकॉर्ड जुटाने और सरकार के जवाब की प्रक्रिया में है।
सरकार के जवाब के बाद आगे बढ़ेगी सुनवाई
अब राज्य सरकार को योजना से जुड़े रिकॉर्ड और हितग्राहियों का विवरण उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद अदालत याचिका में उठाए गए मुद्दों पर आगे सुनवाई करेगी। योजना को लेकर अंतिम निर्णय अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन है।
इसलिए फिलहाल लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को मिलने वाली सहायता जारी है और किस्त रोकने का कोई हाईकोर्ट आदेश नहीं है।