रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुरक्षित, सुगम और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए ‘जीरो फेटेलिटी’ यानी सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को न्यूनतम करने के लक्ष्य के साथ मिशन मोड में काम करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि हर संभावित जनहानि को रोकना होना चाहिए। इसके लिए दुर्घटना से पहले रोकथाम और हादसे के बाद घायलों को तत्काल सहायता एवं उपचार उपलब्ध कराने, दोनों स्तरों पर व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
23 ब्लैक स्पॉट पर चल रही सुधार की कार्रवाई
सीएम साय ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां सुधारात्मक एवं सुरक्षात्मक उपायों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 23 ब्लैक स्पॉट पर वर्तमान में सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों में तेजी लाने के साथ दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल परिवहन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग और नगरीय निकायों को समन्वित रूप से काम करना होगा।
हादसे के बाद ‘गोल्डन टाइम’ में मिले इलाज
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। घायल व्यक्ति तक जितनी जल्दी सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुंचेगी, उसकी जान बचने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
उन्होंने दुर्घटना की सूचना से लेकर एम्बुलेंस, अस्पताल तक पहुंच और उपचार की पूरी व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
PM-राहत और राहवीर योजना का होगा प्रचार
सड़क दुर्घटना पीड़ितों की तत्काल मदद के लिए मुख्यमंत्री ने PM-राहत योजना और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि PM-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम 7 दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है।
वहीं राहवीर योजना सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर मदद करने वाले नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को यह संदेश दिया जाना चाहिए कि हादसा देखकर घबराने के बजाय पीड़ित की मदद के लिए आगे आएं।
ग्रामीण बस योजना का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की भी समीक्षा की और इसे दूरस्थ क्षेत्रों तक विस्तार देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन ग्रामीण, वनांचल और दूरदराज क्षेत्रों में अभी नियमित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है, उन्हें प्राथमिकता से चिन्हित किया जाए।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में योजना के तहत 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधा से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने को कहा।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कोंटा-जगरगुंडा बस सेवा से 6 घंटे का सफर 45 मिनट में
बैठक में कोंटा-जगरगुंडा के बीच शुरू की गई बस सेवा का उदाहरण भी सामने आया। अधिकारियों के अनुसार, पहले अंदरूनी और सुदूर क्षेत्रों से यह यात्रा करने में करीब 6 घंटे तक लग जाते थे। बस सेवा शुरू होने के बाद यह सफर लगभग 45 मिनट में पूरा हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होती है।
पर्यटन स्थलों तक बढ़ेगी परिवहन कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विकास के लिए परिवहन विभाग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पर्यटन मिशन के साथ परिवहन विभाग को प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने को कहा। इससे पर्यटन के साथ होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान और स्थानीय रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वाहनों की फिटनेस जांच होगी और तकनीक आधारित
मुख्यमंत्री ने वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की मौजूदा व्यवस्था और नए केंद्रों की स्थापना पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित फिटनेस जांच से प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही 15 साल की अवधि पूरी कर चुके वाहनों के नियमानुसार नवीनीकरण और फिटनेस संबंधी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
HSRP और लंबित चालानों की रिकवरी पर जोर
मुख्यमंत्री ने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने के अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन कराने के साथ वाहन मालिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए।
इसके अलावा लंबित चालानों की रिकवरी में तेजी लाने और अत्याधुनिक चालान प्रणाली का प्रभावी इस्तेमाल करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने यातायात नियमों के पालन के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया।
ई-ट्रैक से होगा कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट
बैठक में ई-ट्रैक व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके तहत CCTV कैमरों और सेंसर आधारित तकनीक के माध्यम से कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने को कहा। इससे टेस्ट प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और आवश्यक प्रशिक्षण व दक्षता रखने वाले लोगों को ही लाइसेंस देने में मदद मिलेगी।
सड़क सुरक्षा के लिए सभी विभाग मिलकर करेंगे काम
बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा को लेकर विभागों के बीच बेहतर समन्वय और परिणाम आधारित कार्ययोजना जरूरी है। ‘जीरो फेटेलिटी’ के लक्ष्य की दिशा में सड़क संरचना, वाहन फिटनेस, यातायात नियमों के पालन, प्रशिक्षित चालकों और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता—सभी पहलुओं पर एक साथ काम करने के निर्देश दिए गए।