उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे धार्मिक स्थलों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए मुस्लिम समाज के कुछ लोग आगे आए हैं। मस्जिद के संबंधित हिस्से पर ग्रीन नेट लगाकर तोड़ने का काम शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल तैनात है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है।
दो दिनों से हो रहा था प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध
शाही मस्जिद के एक हिस्से को चौड़ीकरण के लिए हटाए जाने को लेकर पिछले दो दिनों से मुस्लिम समाज के कुछ लोगों की ओर से विरोध किया जा रहा था। सोमवार रात भी बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर एकत्र हुए और विरोध जताया।
पूरी रात इलाके में गहमागहमी बनी रही। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बैठक की चर्चा
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बैठक हुई थी। इसमें चौड़ीकरण की जद में आए हिस्से को समाज के लोगों द्वारा स्वयं हटाने पर सहमति बनने की बात कही जा रही है।
हालांकि, इस बैठक और सहमति को लेकर प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में कार्रवाई से संबंधित विवरण की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
काजी शमशु रहमान ने आपसी समन्वय पर दिया जोर
काजी शमशु रहमान ने कहा कि सभी कार्य आपसी समन्वय से किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज के लोग मिलकर सिंहस्थ का आयोजन सफल बनाने में सहयोग करेंगे।
उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर देते हुए कहा कि दोनों समुदायों के लोग भाई हैं और एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। सिंहस्थ का स्वागत पूरे जोश और उत्साह के साथ किया जाएगा।
काजी ने कहा कि खड़े हनुमान जी और शाही मस्जिद को लेकर जो स्थिति बनी थी, उसे प्रशासन के साथ आपसी समन्वय के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चौड़ीकरण कार्य
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण और अन्य व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रस्तावित विकास कार्यों की जद में आने वाले धार्मिक स्थलों को लेकर प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत की जा रही है।
शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के बीच प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और प्रक्रिया को समन्वय के साथ आगे बढ़ाना है।