- Pateshwar Dham में शनिवार को आदिवासी समाज की पारंपरिक देव जातरा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
- इस आयोजन में Chhattisgarh के विभिन्न जिलों सहित बालोद क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
- सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 3,000 से अधिक पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की गई थी।
- श्रद्धालुओं ने लगभग 4 किलोमीटर लंबे दुर्गम पहाड़ी मार्ग को पार कर पहाड़ी पर स्थित पाट बाबा तथा नीचे स्थित जलकैना में दर्शन-पूजन किया और परंपरानुसार जीव सेवा की।
- आदिवासी समाज के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, जिसमें श्रद्धालु अपने आराध्य आंगा देव और पाट बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

पृष्ठभूमि
- हाल ही में पाटेश्वर धाम को लेकर विवाद के कारण यह आयोजन संवेदनशील माना जा रहा था।
- आदिवासी समाज ने Balak Das पर लगभग 12 एकड़ वन भूमि पर कब्जा और अवैध निर्माण का आरोप लगाया था।
- इस मुद्दे को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए जलकैना क्षेत्र से लगी बाउंड्री वॉल को जेसीबी मशीनों की मदद से हटाया।
- प्रशासन, आदिवासी समाज और राज्य स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद देव जातरा को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने पर सहमति बनी।
विशेष उल्लेख
- Anil Netam, जो एक पैर से दिव्यांग हैं, बैसाखी के सहारे कठिन पहाड़ी मार्ग तय कर पाट बाबा के दर्शन करने पहुंचे।
- उन्होंने इसे अपने समाज की आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व बताया।
मुख्य निष्कर्ष:
हालिया विवाद और संवेदनशील परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सहमति के कारण पाटेश्वर धाम की देव जातरा शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुई।