
- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने ग्राम रोजगार सहायक को बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए सेवा से हटाने की कार्रवाई को अवैध ठहराया है।
- जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
- मामला तखतपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत जरौंधा ग्राम पंचायत में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक नीता बाई डाहीरे से जुड़ा है।
- उन पर अनियमितता और फर्जी मस्टर रोल तैयार करने के आरोप लगाकर सेवा से हटा दिया गया था।
- याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने बताया कि सेवा समाप्ति से पहले न तो नोटिस दिया गया और न ही पक्ष रखने का अवसर मिला।
- न्यायालय ने पाया कि सेवा समाप्ति आदेश आरोपों पर आधारित और कलंककारी (Stigmatic) प्रकृति का था, इसलिए सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य था।
- हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को 45 दिनों के भीतर वेतन एवं अन्य आर्थिक लाभ देने का निर्देश दिया।
- साथ ही जनपद पंचायत तखतपुर को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता भी दी गई।
मुख्य संदेश: किसी कर्मचारी को आरोपों के आधार पर दंडात्मक रूप से हटाने से पहले उसे नोटिस देना और सुनवाई का अवसर प्रदान करना आवश्यक है। हाईकोर्ट का यह फैसला संविदा कर्मचारियों के अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।