पन्ना। रूंझ और मझगांय बांध परियोजना में विस्थापित आदिवासी परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वार्ड नंबर 14 के पार्षद और कांग्रेस जिला महामंत्री वैभव थापक ने प्रेसवार्ता कर मामले में कई सवाल उठाए और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

पटवारी के लोकायुक्त ट्रैप का किया जिक्र
वैभव थापक ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए हाल ही में रिश्वत लेते पकड़े गए पटवारी के लोकायुक्त ट्रैप का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई के बाद परियोजना से जुड़े मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की जरूरत और बढ़ गई है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
7.50 लाख के पुनर्वास पैकेज और मकान के मुआवजे का दावा
विस्थापन से प्रभावित रमिया आदिवासी के नाती दासी लाल ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उनका 7.50 लाख रुपये का पुनर्वास पैकेज और मकान का मुआवजा अब तक अटका हुआ है।
परिवार की ओर से दावा किया गया है कि मुआवजा नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, रमिया आदिवासी के बड़े बेटे के करीब 75 लाख रुपये के कथित हक का मामला भी सामने रखा गया है।
प्रभावित परिवारों की ग्रामवार सूची और रिकॉर्ड ऑडिट की मांग
कांग्रेस नेता वैभव थापक ने परियोजना से प्रभावित परिवारों की ग्रामवार सूची सार्वजनिक करने, मुआवजा एवं पुनर्वास से जुड़े रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को उनके अधिकार और मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए। थापक ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
फिलहाल मुआवजे और पुनर्वास से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति तथा कथित अनियमितताओं की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।