September 14, 2026

रायपुर। लोक भवन में राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के साथ-साथ इसके संरक्षण, संवर्धन और विकास को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। राज्यपाल ने इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए एक समिति के गठन की बात कही।

करीब 2 करोड़ लोग करते हैं छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग

भाषाविदों ने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ी भाषा की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा, व्याकरण, शब्दकोश और मानकीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी प्रदेश की राजभाषा और प्रमुख संपर्क भाषा है तथा करीब 2 करोड़ लोग इसका प्रयोग करते हैं।

भाषाविदों के मुताबिक छत्तीसगढ़ी में 15वीं शताब्दी से साहित्य सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। कविता, खंडकाव्य, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना और पत्रकारिता समेत विभिन्न साहित्यिक विधाओं में छत्तीसगढ़ी की पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।

छत्तीसगढ़ी के व्याकरण और शब्दकोश का भी उल्लेख

मुलाकात के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ी का व्याकरण वर्ष 1890 में तैयार किया गया था, जबकि पहला शब्दकोश 1939 में तैयार हुआ। वर्ष 1924 में पहला छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘हीरू के कहिनी’ प्रकाशित हुआ था।

भाषाविदों ने यह भी बताया कि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल से हस्तलिखित छत्तीसगढ़ी पत्रिका ‘दुलरवा’ का प्रकाशन किया था। इन उदाहरणों के जरिए छत्तीसगढ़ी की ऐतिहासिक और साहित्यिक समृद्धि की जानकारी राज्यपाल को दी गई।

राज्यपाल बोले- समिति बनाकर सामग्री का व्यवस्थित संकलन होगा

राज्यपाल रमेन डेका ने इस विषय पर खुद पहल करते हुए सार्थक चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास और इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की बात कही।

राज्यपाल ने कहा कि इस विषय पर एक समिति का गठन किया जाएगा। समिति छत्तीसगढ़ी भाषा के इतिहास, साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश और अन्य संदर्भ सामग्री का व्यवस्थित संकलन करेगी। इसके लिए विषय से जुड़े विद्वानों और विशेषज्ञों से आवश्यक जानकारी और सुझाव भी लिए जाएंगे।

उन्होंने इस संदर्भ में असमिया और बोडो भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने का उदाहरण भी दिया।

विश्वविद्यालयों में हो रहा छत्तीसगढ़ी का अध्ययन

भाषाविदों ने बताया कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर छत्तीसगढ़ी भाषा का अध्ययन कराया जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा पहली से आठवीं तक के पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की प्रक्रिया भी जारी है।

मुलाकात के दौरान भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर, डॉ. सुधीर शर्मा, छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और अर्चना पाठक उपस्थित रहे।

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