रायपुर। निजी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने कॉलेजों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही स्पष्ट किया है कि छात्रावास और ट्रांसपोर्ट की सुविधा लेना छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

मामले का अंतिम निराकरण होने तक समिति ने अंतरिम राहत देते हुए कॉलेजों को निर्देश दिया है कि जो विद्यार्थी छात्रावास में नहीं रहना चाहते, उन्हें डे-स्कॉलर के रूप में पढ़ाई करने की अनुमति दी जाए। इससे कॉलेज के बाहर रहकर पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट की अनिवार्यता पर उठे सवाल
निजी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए छात्रावास और ट्रांसपोर्ट की सुविधा अनिवार्य किए जाने का मुद्दा सामने आने के बाद समिति ने मामले का संज्ञान लिया। समिति ने संबंधित कॉलेजों से इस व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा है।
जारी नोटिस के मुताबिक, कॉलेजों को सात दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। वहीं, अंतिम निर्णय आने तक कॉलेजों को निर्देशों का पालन करते हुए इच्छुक विद्यार्थियों को डे-स्कॉलर के तौर पर पढ़ाई जारी रखने का विकल्प देना होगा।
सामाजिक कार्यकर्ता निश्चय बाजपेई ने उठाया था मुद्दा
इस मामले को सामाजिक कार्यकर्ता निश्चय बाजपेई ने प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने निजी मेडिकल कॉलेजों में छात्रावास और ट्रांसपोर्ट की सुविधा अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाते हुए विद्यार्थियों को राहत देने की मांग की थी।
इस संबंध में उन्होंने प्रेसवार्ता भी की थी। इसके बाद पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
अंतिम फैसले तक डे-स्कॉलर के रूप में पढ़ाई का विकल्प
प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के अंतरिम निर्देश से उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जो कॉलेज के छात्रावास में नहीं रहना चाहते और बाहर रहकर पढ़ाई करना चाहते हैं। अब संबंधित कॉलेजों को सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देना होगा। मामले में समिति के अंतिम निर्णय के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।