September 14, 2026

मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में गौशालाओं के संचालन और सरकारी अनुदान को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरक्षकों और समाजसेवियों ने पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत पर गौशालाओं के संचालन में अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

समाजसेवी अखिलेश पांडे ने इस मामले में जिला कलेक्टर से शिकायत कर डिप्टी डायरेक्टर, उनके परिवार के सदस्यों और कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों की संपत्तियों तथा बैंक खातों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अब प्रशासनिक जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

गौशालाओं की क्षमता से कई गुना अधिक गोवंश दर्ज करने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मऊगंज जिले में सरकार की गोवंश संरक्षण योजना के तहत संचालित कई गौशालाएं जमीनी स्तर पर अधूरी हैं या उनमें पर्याप्त संख्या में गोवंश मौजूद नहीं है।

आरोप है कि जिन गौशालाओं की वास्तविक क्षमता करीब 100 गोवंश तक है, उनके रिकॉर्ड में 400 से 1000 तक गोवंश दर्ज किए गए और इसी आधार पर अनुदान राशि का भुगतान कराया गया।

बेलाहा पंचायत की गौशाला पर भी सवाल

बेलाहा पंचायत की गौशाला को शिकायतकर्ताओं ने इसका उदाहरण बताया है। आरोप है कि निर्माणाधीन गौशाला में पानी, चारा और पर्याप्त शेड जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी नहीं होने के बावजूद उसे रिकॉर्ड में संचालित दिखाया गया और करीब 59 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए गौशाला के रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट, भुगतान विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी होगी।

डिप्टी डायरेक्टर की संपत्तियों को लेकर शिकायत

शिकायत में डिप्टी डायरेक्टर जे.एल. साकेत और उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज कथित संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक—

  • अटरिया गांव में खसरा नंबर 16, 29/2 और 50/3 को मिलाकर करीब 15 एकड़ 44 डिसमिल जमीन पर फार्म हाउस होने का दावा किया गया है।
  • रीवा के संजय नगर, करही वार्ड क्रमांक 6 में खसरा नंबर 31/1/16/11/2 पर बेटे पुनीत कुमार साकेत के नाम करीब 37 लाख रुपये की आधिकारिक कीमत वाला दो मंजिला मकान होने की बात शिकायत में कही गई है।
  • घूरेहटा में बेटियों रश्मि और पूनम साकेत के नाम जमीन खरीदे जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस लेन-देन में गौसेवक सतानंद पाठक के बैंक खाते से भुगतान होने की बात भी कही है।
  • ढेरा में खसरा नंबर 60/7 और खसरा नंबर 51/20/1/3 में जे.एल. साकेत तथा उनकी पत्नी आशा साकेत के नाम संपत्ति होने का दावा किया गया है।

इन संपत्तियों की खरीद के स्रोत और संबंधित व्यक्तियों की आय के बीच संबंध की जांच की मांग की गई है।

बेटे की गाड़ी विभाग में अटैच करने का भी आरोप

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि जे.एल. साकेत के बेटे के नाम पंजीकृत वाहन MP-66-C-87-77 को विभागीय उपयोग में लगाया गया और सरकारी धन से उससे संबंधित लाभ लिया गया।

यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो वाहन के विभागीय उपयोग, भुगतान और अनुमति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।

गौशाला संचालक से बेटी के खाते में 35 हजार रुपये ट्रांसफर का दावा

शिकायतकर्ताओं ने कुछ डिजिटल लेन-देन का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक 5 जून 2025 को UTR नंबर 922904839585 के जरिए 35 हजार रुपये एक गौशाला संचालक की ओर से रश्मि साकेत के खाते में ट्रांसफर किए गए।

इसके अलावा रीवा में मकान की खरीद से जुड़े एक लेन-देन में 7 लाख रुपये के चेक नंबर 101807 का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता इन लेन-देन को कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर जांच की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, किसी बैंक लेन-देन का होना अपने आप में रिश्वत या भ्रष्टाचार साबित नहीं करता। लेन-देन का उद्देश्य, पक्षकारों के बीच संबंध और पैसे के स्रोत की जांच के बाद ही इसकी वास्तविक प्रकृति स्पष्ट होगी।

कमिश्नर से भी मांगा गया जवाब

मामले को लेकर संभागीय कमिश्नर शैलेंद्र सिंह से भी सवाल किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कैमरे के सामने इस मामले पर जवाब नहीं दिया।

वहीं, समाजसेवी अखिलेश पांडे ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर डिप्टी डायरेक्टर, उनके परिवार के सदस्यों और सतानंद पाठक से जुड़े बैंक खातों एवं संपत्तियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अब प्रशासनिक जांच पर टिकी नजर

मऊगंज में गौशालाओं के संचालन, सरकारी अनुदान के उपयोग और संबंधित अधिकारियों की संपत्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है।

शिकायत में जिन संपत्तियों, बैंक खातों, चेक और UTR का उल्लेख किया गया है, उनकी राजस्व रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट, विभागीय भुगतान रिकॉर्ड, गौशाला निरीक्षण रिपोर्ट और आय के स्रोत से मिलान होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

फिलहाल जे.एल. साकेत के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के विषय हैं और उन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गौशालाओं के अनुदान और कथित संपत्ति लेन-देन में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

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