भोपाल। मध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मंत्री विजय शाह के मामले में लिए गए फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।
प्रतिनिधिमंडल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और विधायक सुरेश राजे शामिल रहे।

‘सेना और देश की बेटी का अपमान हुआ, सरकार चुप’
राज्यपाल से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देश की बेटी और सेना का अपमान हुआ है, इसके बावजूद सरकार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से पूरे मामले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
UCC को उमंग सिंघार ने बताया ‘काला कानून’
उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि यदि वर्ष 2028 में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस कानून को खत्म किया जाएगा।
सिंघार ने कहा कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में यह कानून पारित कराया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में संविधान मौजूद है तो अलग से ऐसे कानून की आवश्यकता क्यों है।
राहुल गांधी की इंदौर सभा को लेकर भी बयान
इंदौर में राहुल गांधी की सभा के लिए अनुमति नहीं मिलने के सवाल पर उमंग सिंघार ने कहा कि राहुल गांधी की सभा इंदौर में ही होगी।
उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत के कथित बयानों का भी जिक्र किया और कहा कि यदि हिंदू-मुस्लिम एकता की बात कही जा रही है तो ऐसे बयान देश में भी दिए जाने चाहिए।
आरिफ मसूद बोले- धार्मिक आजादी पर हमला
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने UCC को लेकर कहा कि उमंग सिंघार ने जो बात कही है, वह सही है। उन्होंने दावा किया कि UCC लागू करना संविधान के अनुच्छेद 29 से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन है और इसे लागू करना मुसलमानों की धार्मिक आजादी पर हमला है।
विजय शाह मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएगी रिपोर्ट
गौरतलब है कि मंत्री विजय शाह और कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद से जुड़े मामले में SIT ने जांच पूरी कर सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में पेश की थी। SIT की ओर से मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति की मांग की गई थी।
इसके बाद राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह राजभवन को अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का प्रस्ताव भेजा था। राज्यपाल की मंजूरी के बाद अब मामले से संबंधित जानकारी और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष होगा।