गरियाबंद जिले के देवभोग स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में छात्राओं के लिए स्वीकृत अतिरिक्त आवासीय कमरों के निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्कूल परिसर में 6 कमरों का भवन बनाया जाना था, लेकिन आरोप है कि हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने स्वीकृत योजना में बदलाव कर करीब 300 मीटर दूर दूसरे भवन में 9 कमरे बनवा दिए।
नए भवन के उपयोग को लेकर स्कूल प्रबंधन समिति और पालकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि दूरी के कारण छात्राओं को यहां आवासीय सुविधा देना व्यवहारिक और सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है। समिति ने मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

48-48 लाख रुपये के भवनों को मिली थी मंजूरी
जानकारी के अनुसार देवभोग और मैनपुर के कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए अतिरिक्त आवासीय कक्ष निर्माण को केंद्र से वर्ष 2024 में 48-48 लाख रुपये के भवनों की मंजूरी मिली थी।
प्रदेश कार्यालय ने निर्माण की जिम्मेदारी एजेंसी के तौर पर हाउसिंग बोर्ड को सौंपी थी। उद्देश्य विद्यालय परिसर में अतिरिक्त आवासीय सुविधा तैयार करना था, ताकि छात्राओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर रहने की व्यवस्था बेहतर हो सके।
आरोप- ड्राइंग में बदलाव कर 300 मीटर दूर कराया निर्माण
स्कूल प्रबंधन के अनुसार छात्रावास परिसर में भवन निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध थी और यह स्थान हाउसिंग बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों को भी दिखाया गया था। इसके बावजूद निर्माण की ड्राइंग में बदलाव किए जाने का आरोप है।
बताया गया कि नए डिजाइन के बाद भवन को स्कूल परिसर के बजाय करीब 300 मीटर दूर शैक्षणिक भवन के ऊपर फर्स्ट फ्लोर पर बनाया गया। इस प्रक्रिया में स्वीकृत लागत में भी करीब 4 लाख रुपये की कमी किए जाने की बात सामने आई है।
शिकायत के मुताबिक डिजाइन में 13 कमरे प्रस्तावित थे, लेकिन निर्माण के बाद मौके पर केवल 9 कमरे बनाए गए। जिस भवन के ऊपर निर्माण किया गया, वहां पहले से कॉलम मौजूद थे और उन्हीं पर लैपिंग कर नया निर्माण किए जाने की जानकारी दी गई है।
हैंडओवर के दौरान सामने आईं निर्माण संबंधी कमियां
निर्माण पूरा होने के बाद हाउसिंग बोर्ड और ठेका कंपनी की ओर से भवन का हैंडओवर लेने के लिए दबाव बनाए जाने की बात भी सामने आई है।
मैनपुर कस्तूरबा विद्यालय की अधीक्षिका ने भवन का हैंडओवर लेते समय पत्र में निर्माण और संचालन से जुड़ी कमियों का उल्लेख किया। इससे विभाग के उच्च अधिकारियों को मौके की स्थिति की जानकारी मिली।
वहीं, नए भवन के उपयोग को लेकर छात्राओं और पालकों में भी नाराजगी बताई जा रही है।
‘छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा से समझौता नहीं’
स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुन्दर सिंह और पालकों का कहना है कि निर्माण में जो भी प्रक्रिया अपनाई गई हो, लेकिन छात्राओं की सुविधा और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
समिति का कहना है कि स्कूल परिसर से 300 मीटर दूर स्थित भवन में छात्राओं को आवासीय सुविधा देना व्यवहारिक नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही, यदि दूर स्थित भवन का इस्तेमाल ही किया जाना है तो उसके लिए आवश्यक नया सेटअप और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मंजूरी देने की मांग भी की गई है।
राज्य कार्यालय से मांगा गया मार्गदर्शन
इस मामले में गरियाबंद DMC शिवेश शुक्ला ने बताया कि भवन की मंजूरी से लेकर निर्माण की मॉनिटरिंग तक की प्रक्रिया प्रदेश कार्यालय स्तर से हुई है।
उन्होंने बताया कि हैंडओवर के समय अधीक्षिका ने मार्गदर्शन मांगा था। मौके पर अधीक्षिका के रहने के कारण उन्हें वास्तविक स्थिति लिखकर हैंडओवर लेने के लिए कहा गया। इसके बाद सामने आया कि प्रस्तावित 13 कमरों के बजाय मौके पर 9 कमरे हैं और संचालन से जुड़ी अन्य व्यवहारिक दिक्कतें भी हैं।
DMC के मुताबिक मामले की जानकारी राज्य कार्यालय को भेजकर मार्गदर्शन मांगा गया है। अब राज्य स्तर से मिलने वाले निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।