September 21, 2026

सिंगरौली: मध्य प्रदेश की ‘ऊर्जाधानी’ के नाम से पहचाने जाने वाले सिंगरौली में बढ़ते औद्योगिकीकरण के साथ प्रदूषण का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है। जहरीली हवा, राखड़ और दूषित पानी की शिकायतों के बीच पूर्व सांसद और वर्तमान में सीधी विधायक रीति पाठक के एक बयान ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

सिंगरौली से करीब 10 वर्षों तक सांसद रहीं रीति पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदूषण को लेकर अपने कार्यकाल के दौरान किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए स्वीकार किया कि पत्राचार के बावजूद समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

प्रदूषण को लेकर लगातार लिखे पत्र, लेकिन कार्रवाई नहीं

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने रीति पाठक से सिंगरौली में प्रदूषण और दूषित पानी की समस्या को लेकर सवाल किया। जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे को लेकर लगातार पत्र लिखे, लेकिन इसका असर जमीन पर दिखाई नहीं दिया।

रीति पाठक के मुताबिक, प्रदूषण को लेकर कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। उनके इस बयान से सिंगरौली में लंबे समय से चली आ रही प्रदूषण की समस्या को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

10 साल के कार्यकाल को लेकर उठ रहे सवाल

रीति पाठक के बयान के बाद अब उनके पूर्व सांसद के तौर पर 10 साल के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि प्रदूषण की समस्या को लेकर लगातार पत्र लिखे गए थे, तो संबंधित प्रशासन और विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।

सिंगरौली के लोग लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े प्रदूषण, हवा में राखड़ और पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताते रहे हैं। क्षेत्र में प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

बयान ने सिंगरौली के प्रदूषण के मुद्दे को फिर गरमाया

पूर्व सांसद का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब सिंगरौली में औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। रीति पाठक द्वारा अपने कार्यकाल में किए गए पत्राचार और अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की बात स्वीकार किए जाने के बाद अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सिंगरौली की जनता के लिए साफ हवा और स्वच्छ पेयजल लंबे समय से प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण की समस्या पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई कब होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

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