भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी के पूर्व नेताओं और पदाधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए हैं। ‘ऑफिस ऑफ दिग्विजय सिंह’ के सोशल मीडिया अकाउंट ‘X’ पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस के पुराने रुख और अपने राजनीतिक अनुभवों का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के खिलाफ अपने लंबे संघर्ष का दावा किया।

‘जब RSS के खिलाफ बोलता था तो मुझे अकेला छोड़ दिया जाता था’
दिग्विजय सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि वह वर्ष 1972 से RSS, VHP और बजरंग दल के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह ऐसे क्षेत्र से आते हैं जिसे संघ की ‘नर्सरी’ कहा जाता है। इसी क्षेत्र से उन्होंने चुनाव लड़ा, जीत हासिल की और कांग्रेस को भी चुनाव जिताया।
दिग्विजय सिंह के मुताबिक, जब भी वह इन संगठनों के खिलाफ आवाज उठाते थे, तब AICC के तत्कालीन मीडिया विभाग के प्रमुख उनके बयानों से दूरी बना लेते थे। उनके बयानों को ‘निजी बयान’ बताकर पार्टी की आधिकारिक राय से अलग कर दिया जाता था।
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पर भी लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के केंद्रीय गृहमंत्री को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब वह बम ब्लास्ट के मामलों में आरोपी RSS कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत लेकर तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री के पास पहुंचे थे, तब गृहमंत्री ने RSS को एक ‘राष्ट्रवादी संगठन’ बताया था।
दिग्विजय सिंह के इस दावे के बाद कांग्रेस के पुराने राजनीतिक रुख और आतंकवाद से जुड़े मामलों में तत्कालीन सरकार की कार्रवाई को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।
‘अब पार्टी को समझ आया संघ का असली चेहरा’
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने RSS के कथित ‘असली चेहरे’ को पहचान लिया है।
उन्होंने अपने पोस्ट में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और प्रियंक खड़गे का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संघ के बारे में उनकी बात को समझा है।
दिग्विजय सिंह के बयान से सियासी चर्चा तेज
दिग्विजय सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब RSS और कांग्रेस के बीच वैचारिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार होती रही है। अपने ही दल के पुराने नेताओं और सरकार के दौरान लिए गए रुख का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने पार्टी के तत्कालीन रवैये पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए हैं।
उनके बयान के बाद मध्य प्रदेश के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी कांग्रेस की पुरानी कार्यप्रणाली और RSS को लेकर पार्टी के रुख पर चर्चा तेज हो गई है।