भोपाल। मध्यप्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों के लिए 1 सितंबर का दिन खास रहा। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए राशि ट्रांसफर की। इस दौरान 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले 1 लाख 21 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों के खातों में ₹304 करोड़ से अधिक की राशि भेजी गई। प्रत्येक पात्र विद्यार्थी के खाते में ₹25 हजार की राशि ट्रांसफर की गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद भी किया। कुछ विद्यार्थियों की उपलब्धियां सुनकर उन्होंने न केवल उनकी सराहना की, बल्कि पूरे सभागार से उनके लिए तालियां भी बजवाईं।

विद्यार्थियों के साथ रिमोट का बटन दबाकर किया राशि ट्रांसफर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप प्रदान किए। खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को योजना की राशि ट्रांसफर करने के लिए मुख्यमंत्री ने उनके साथ रिमोट का बटन क्लिक करवाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उनकी उच्च शिक्षा को आसान बनाना है।
छात्रों से पूछा- बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और पूछा कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि वह राजनेता बनना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को अच्छे राजनेताओं की भी जरूरत है।
वीरेंद्र ने कहा कि उसने लोगों की परेशानियां देखी हैं और वह राजनीति के माध्यम से उन समस्याओं को दूर करना चाहता है। उसका लक्ष्य देश के विकास में योगदान देना है।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से पूछा कि कितने बच्चों के परिवार खेती-किसानी से जुड़े हैं और कितने विद्यार्थी भविष्य में किसान बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी हमारी जड़ है और देश की व्यवस्था में किसानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
‘नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे’
छात्रा हिमांशी पाठक ने बताया कि वह शुरुआत में एयर होस्टेस बनना चाहती हैं, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य एंटरप्रिन्योर बनना है। उन्होंने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, इसलिए अपना काम शुरू करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरल भाषा में इसका मतलब है कि हम नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे।
हिमांशी ने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ इसी तरह मंच साझा करने का सपना देखा था। यह सुनकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के बीच खुशी का माहौल बन गया।
NEET-JEE पास करने वाले विद्यार्थियों ने भी चौंकाया
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी उपलब्धियों से सभी को प्रभावित किया। छात्रा तन्वी के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि उसने 12वीं की पढ़ाई के साथ ही नीट परीक्षा भी पास कर ली और पहली कोशिश में सफलता हासिल की। तन्वी ने बताया कि उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना है।
वहीं छात्र ओम चौकसे ने बताया कि उसने 12वीं के साथ NEET और JEE Main जैसी परीक्षाएं भी पास की हैं। उसकी उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्र भले छोटी हो, लेकिन बच्चों के सपने और उनकी छलांग बड़ी है।
ओम के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि उसके पिता बैग बनाने का काम करते हैं और उनके पास अपनी दुकान भी नहीं है। इसके बावजूद ओम ने अपनी मेहनत से बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
एक अन्य छात्र अभिषेक ने बताया कि वह भविष्य में इसरो का वैज्ञानिक बनना चाहता है।
‘असफलता को दिल पर न लें’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को सफलता और असफलता को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मेहनत से सफलता हासिल कर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन करना चाहिए, लेकिन सफलता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में अगर कभी असफलता मिले तो उसे दिल पर नहीं लेना चाहिए। पिछली गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा इंसान केवल कागज पर मिले नंबरों से नहीं बनता, बल्कि अच्छे संस्कार और सोच से बनता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान और कौशल सफलता के दो महत्वपूर्ण आधार हैं।
अब तक 6.50 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मिली योजना की राशि
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत पहले वर्ष 473 विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए गए थे। पिछले साल करीब 92 हजार विद्यार्थी इस योजना से लाभान्वित हुए, जबकि इस वर्ष स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब 1.22 लाख विद्यार्थी योजना के दायरे में आए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल में करीब पौने तीन लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए राशि वितरित की गई है। योजना के तहत अब तक लगभग 6.50 लाख विद्यार्थियों को ₹1,620 करोड़ की राशि उनके खातों में भेजी जा चुकी है।
MP में 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार UG सीटों का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी विस्तार कर रही है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद 55 वर्षों में प्रदेश में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर प्रदेश में कुल 33 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं।
राज्य में वर्तमान में 6,500 से अधिक एमबीबीएस सीटें हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले दो वर्षों में 5 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए हैं, जिससे यूजी स्तर पर करीब 2,400 सीटों की वृद्धि हुई है।
सरकार ने वर्ष 2028 तक प्रदेश में 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार यूजी मेडिकल सीटें करने का लक्ष्य रखा है।
सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट दर शून्य करने का दावा
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 12वीं कक्षा में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए राशि दी जा रही है।
मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पिछले तीन वर्षों में प्रवेश दर में लगातार वृद्धि हुई है और सरकार के प्रयासों से ड्रॉपआउट दर शून्य हुई है।
18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती
स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब 70 से 72 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगभग 18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रतिबद्ध है।
मंत्री ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य और प्रदेश की आशा हैं। यही विद्यार्थी वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे।