उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद माह की छठी और अंतिम राजसी सवारी सोमवार को निकलेगी। भाद्रपद माह की यह दूसरी और अंतिम सवारी होगी, जिसे प्रमुख राजसी सवारी के रूप में निकाला जाएगा। इस दौरान भगवान श्री महाकालेश्वर अपने भक्तों को छह अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देंगे।

शाम 4 बजे मंदिर से शुरू होगी सवारी
राजसी सवारी निर्धारित समय के अनुसार शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होगी। भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर रजत पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
सवारी का मार्ग महाकाल रोड, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी और हरसिद्धि पाल होते हुए रामघाट तक रहेगा। यहां मां शिप्रा के तट पर पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर और गजराज पर सवार भगवान श्री मनमहेश का विधिवत पूजन-अर्चन और आरती की जाएगी।
छह स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल
राजसी सवारी में भगवान महाकाल के अलग-अलग स्वरूप भक्तों को दर्शन देंगे। इसमें:
- रजत पालकी: श्री चन्द्रमौलेश्वर
- गजराज: श्री मनमहेश
- गरुड़ रथ: श्री शिवतांडव
- नंदी रथ: श्री उमा-महेश
- डोल रथ: श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद
- छठी सवारी: श्री सप्तधान के मुखारविंद
इस तरह भक्तों को राजसी सवारी के दौरान बाबा महाकाल के छह स्वरूपों के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।
सभामंडप में होगा विशेष पूजन
राजसी सवारी निकलने से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद भगवान को रजत पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया जाएगा।
मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की पालकी को सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर देंगे।
रामघाट पर होगी शिप्रा आरती
सवारी के रामघाट पहुंचने के बाद मां शिप्रा के तट पर भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर और श्री मनमहेश का पूजन किया जाएगा। इसके बाद आरती होगी। राजसी सवारी को लेकर प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
बाबा महाकाल की सवारी के इस अंतिम राजसी आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद है।