बड़वानी। मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा शहर में आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर में आवारा कुत्तों के हमले से लोगों में दहशत का माहौल है। पिछले दो दिनों में ही 20 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले दो महीनों में कुत्ते के काटने के 730 से ज्यादा मामले सामने आने की बात कही जा रही है।
आवारा मवेशियों के कारण भी शहर की सड़कों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही गंदगी और बदबू की समस्या से भी रहवासी परेशान हैं।

इन इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड से दहशत
सेंधवा के नलेपार, सुदामा कॉलोनी, निवाली रोड, नया बस स्टैंड, पुराना एबी रोड, किला परिसर और वरला रोड समेत कई प्रमुख इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं।
रहवासियों के मुताबिक, बच्चों और बुजुर्गों के साथ दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी इन इलाकों से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। लगातार सामने आ रही डॉग बाइट की घटनाओं के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
बदबू से परेशान लोग, कूलर तक उल्टी दिशा में चलाने की मजबूरी
आवारा मवेशियों के जमावड़े और सड़कों पर फैली गंदगी के कारण दुर्गंध की समस्या भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर हालात इतने खराब हैं कि घरों के भीतर तक बदबू पहुंच रही है।
रहवासियों के मुताबिक, बदबू के साथ मक्खी-मच्छरों की समस्या से बचने के लिए कुछ लोग अपने घरों में कूलर तक उल्टी दिशा में चलाने को मजबूर हैं। इससे शहर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
दो महीने में 730 से ज्यादा डॉग बाइट के मामले
सेंधवा सिविल अस्पताल के डॉक्टर रोहित धाकड़ के मुताबिक, पिछले दो दिनों में 20 से अधिक डॉग बाइट के मरीज अस्पताल पहुंचे हैं। वहीं, पिछले दो महीनों में कुत्ते के काटने के मामलों का आंकड़ा 730 के पार पहुंच गया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या को लेकर नगर पालिका से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।
नगर पालिका ने बनाई विशेष टीमें
मामला सामने आने के बाद नगर पालिका सेंधवा की सीएमओ मधु चौधरी ने बताया कि सिविल अस्पताल से मरीजों की जानकारी मिलने के बाद विशेष टीमों का गठन किया गया है। नगर पालिका की ओर से शहर में आवारा कुत्तों और मवेशियों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात कही गई है।
अब सवाल यह है कि नगर पालिका की यह कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होती है और सेंधवावासियों को आवारा कुत्तों व मवेशियों की समस्या से स्थायी राहत कब तक मिलती है।