नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना पूर्व अनुमति प्रसारित करने, अपलोड करने, पोस्ट करने, री-पोस्ट करने, मॉनेटाइज करने या संग्रहित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
इस मामले में विभिन्न हाईकोर्ट को भी पक्षकार बनाने का आग्रह किया गया था। मौखिक उल्लेख के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश, इलाहाबाद, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत कई हाईकोर्ट को प्रतिवादी बनाया। इनमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को प्रतिवादी क्रमांक 12 के रूप में शामिल किया गया है।

हाईकोर्ट से मांगी गई स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने संबंधित हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग से जुड़े मॉडल नियमों को अपनाने की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।
रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि न्यायिक कार्यवाही की लगातार और निर्बाध लाइव स्ट्रीमिंग का क्या प्रभाव पड़ रहा है और इसे व्यवहारिक रूप से किस तरह लागू किया जा सकता है।
बिना अनुमति रिकॉर्डिंग को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे
अंतरिम व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना पूर्व अनुमति:
- सोशल मीडिया पर अपलोड या पोस्ट
- री-पोस्ट या ट्रांसमिट
- मॉनेटाइज
- संशोधित या एडिट
- स्टोर या आर्काइव
- किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होस्ट
नहीं किया जा सकेगा।
इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल अथवा संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी।
अधिकृत मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश में एक अहम स्पष्टीकरण भी दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों द्वारा न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यानी अधिकृत समाचार माध्यम पहले की तरह अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकेंगे। अंतरिम रोक मुख्य रूप से कोर्ट की रिकॉर्डिंग के अनधिकृत डिजिटल इस्तेमाल और प्रसार से संबंधित है।
24 जुलाई को हर्षिता ग्रोवर की याचिका पर हुई थी सुनवाई
यह अंतरिम व्यवस्था 24 जुलाई 2026 को हर्षिता ग्रोवर की रिट याचिका की सुनवाई के दौरान पारित की गई थी। याचिका में न्यायिक कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के इस्तेमाल से जुड़े नियमों तथा उसके डिजिटल प्रसार को लेकर विभिन्न पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया गया।
अब केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों के जवाब के साथ हाईकोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।