September 14, 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल दुर्गा महाविद्यालय में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्र-छात्राओं और महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने भाग लिया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 नवंबर को “अंतरराष्ट्रीय बाल विवाह निषेध दिवस” के रूप में मान्यता दिए जाने की खुशी मनाई गई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ भारत में चलाए जा रहे प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना देश और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

पोस्टर विमोचन के साथ हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने वाले विशेष पोस्टरों के विमोचन और प्रदर्शन के साथ हुई। इस दौरान वक्ताओं ने ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ (JRC) के प्रयासों और बाल विवाह के खिलाफ लंबे समय से चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी।

वक्ताओं ने बताया कि लगातार किए गए प्रयासों के चलते बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ भारत की मुहिम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

प्राचार्य बोलीं- भारत की राह को दुनिया ने स्वीकार किया

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार ने JRC के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संगठन की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि भारत से शुरू हुआ यह अभियान आज दुनिया के लिए मार्गदर्शक बन रहा है।

उन्होंने कहा कि यह देश के लिए गर्व का क्षण है कि बाल विवाह के खिलाफ जिस दिशा में भारत ने पहल की, उसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया।

छात्रों को बताए बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानूनी उपाय

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर ने छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने बाल विवाह से बचाव के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों, बच्चों की सुरक्षा और बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ मिली वैश्विक मान्यता भारत को बाल अधिकारों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश स्थापित करती है।

छात्रों ने ली बाल विवाह के खिलाफ शपथ

कार्यक्रम के दौरान जिला बाल संरक्षण इकाई के गैर-संस्थागत संरक्षण अधिकारी संजय निराला ने छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई। इस दौरान विद्यार्थियों ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा में योगदान देने का संकल्प लिया।

ये लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. प्रतिभा मुखर्जी साहूकार, डॉ. सुनीता चंसोरिया, जिला बाल संरक्षण इकाई के गैर-संस्थागत संरक्षण अधिकारी संजय निराला, सामाजिक कार्यकर्ता गोरखनाथ पटेल और वरिष्ठ पत्रकार सरिता दुबे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इसके अलावा महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, अध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। विद्यार्थियों ने बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया।

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