ग्वालियर। सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की फुफेरी बहन प्रतिमा देवी भी अब मामले में पक्षकार बन गई हैं। एडीजे कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा देवी का पक्ष सुने बिना संपत्ति समझौते से संबंधित अर्जी पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर को होगी।

40 हजार करोड़ की संपत्तियों को लेकर चल रहा विवाद
दरअसल, सिंधिया राजपरिवार की करीब 40 हजार करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही संपत्तियों को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे के बीच संपत्ति से जुड़े अधिकारों को लेकर विवाद बताया गया है।
अब प्रतिमा देवी की याचिका स्वीकार होने के बाद मामले में एक और पक्ष जुड़ गया है। प्रतिमा देवी, बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं।
प्रतिमा देवी ने क्या मांग की?
प्रतिमा देवी ने कोर्ट में मांग की थी कि ऊषा राजे की ओर से संपत्ति समझौते को लेकर दाखिल अर्जी पर कोई फैसला करने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
उनका कहना है कि उनकी मां के हिस्से से जुड़े संपत्ति अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए। प्रतिमा देवी इससे पहले कथित पारिवारिक समझौते और उसमें अपनी सहमति बताए जाने को लेकर आपत्ति दर्ज करा चुकी हैं।
परिवार की ओर से क्या दावा किया गया?
वहीं, परिवार की ओर से कोर्ट में अलग दावा पेश किया गया है। इसके मुताबिक प्रतिमा देवी को कथित समझौते की जानकारी थी और उन्होंने अपनी सहमति से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए थे।
इस दावे के समर्थन में पुराने दस्तावेज और पारिवारिक तस्वीरें भी कोर्ट में पेश किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधानिक स्थिति तथा पक्षों के अधिकारों का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के तहत होगा।
7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
एडीजे कोर्ट द्वारा प्रतिमा देवी की याचिका स्वीकार किए जाने के बाद अब उन्हें सुने बिना ऊषा राजे की ओर से दाखिल संपत्ति समझौते से जुड़ी अर्जी का निराकरण नहीं किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
अब अगली सुनवाई में प्रतिमा देवी के दावों, कथित पारिवारिक समझौते और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर पक्षकारों की दलीलें सामने आने की उम्मीद है।