November 6, 2026

बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाला मामले में आरोपी डॉ. प्रियंका सोनी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिली है। सर्पदंश से मौत के तीन मामलों में कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करने के आरोपों का सामना कर रहीं चिकित्सक को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद स्थायी जमानत दे दी।

विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के बिना आरोपी बनाने की दलील

डॉ. प्रियंका सोनी की ओर से पेश अधिवक्ता ने जमानत आवेदन पर दलील दी कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा तैयार की जाती है। किसी विशेषज्ञ चिकित्सक की रिपोर्ट को गलत या फर्जी साबित करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट जरूरी है।

बचाव पक्ष का तर्क था कि इस मामले में ऐसी किसी विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट मौजूद नहीं है। साथ ही रिपोर्ट को विशेषज्ञ स्तर पर जांच कर खारिज किए जाने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। इन दलीलों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने डॉ. प्रियंका सोनी को स्थायी जमानत प्रदान कर दी।

सर्पदंश मुआवजा हासिल करने के लिए संगठित गिरोह का आरोप

पुलिस की जांच के मुताबिक, सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए कथित तौर पर एक संगठित गिरोह सक्रिय था। जांच में सामने आया कि सिम्स में सर्पदंश से मौत का मामला सामने आते ही गिरोह से जुड़े लोगों को इसकी जानकारी मिल जाती थी।

इसके बाद मृतक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजा योजना के बारे में बताया जाता और मुआवजा प्रकरण तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती थी। पुलिस का आरोप है कि कुछ मामलों में बीमारी से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मौत बताने के लिए शव पर सर्पदंश जैसे निशान बनाए गए।

इसके बाद कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग पंचनामा और पटवारी प्रतिवेदन तैयार कर मुआवजा लेने के लिए प्रकरण आगे बढ़ाए जाते थे।

तहसील कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले की जांच के दौरान तहसील कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी पुलिस के संदेह के घेरे में आई है। जांच में कुछ मामलों में चिकित्सकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, रतनपुर थाना क्षेत्र के एक मामले में हार्ट अटैक से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मौत दर्शाकर सरकारी मुआवजा हासिल करने का प्रयास किया गया।

वहीं कोनी थाना क्षेत्र में दर्ज तीन मामलों के दस्तावेजों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात पुलिस ने कही है।

अब तक 15 मामलों में FIR

पुलिस के मुताबिक, सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच के तहत अब तक 15 मामलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। जांच एजेंसी कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, मुआवजा प्रकरणों को आगे बढ़ाने और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

महत्वपूर्ण: डॉ. प्रियंका सोनी को हाईकोर्ट से स्थायी जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामले में लगे आरोप समाप्त हो गए या उन्हें दोषमुक्त घोषित कर दिया गया है। आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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