September 14, 2026

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। फर्जी मेडिकल डिग्री मामले में दमोह पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए और फिलहाल जेल में बंद निलंबित रेडियोग्राफर हीरा सिंह कौशल का नाम जिला स्तरीय प्रशिक्षण सूची में शामिल पाया गया है।

सीएमएचओ कार्यालय से जारी सूची में हीरा सिंह कौशल को अब भी रेडियोग्राफर बताया गया है और उसका पदस्थापन स्थल बिलकिसगंज स्वास्थ्य केंद्र दर्ज है। इस मामले ने विभाग की रिकॉर्ड अपडेट करने और कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जी मेडिकल डिग्री मामले में गिरफ्तार हुआ था कर्मचारी

हीरा सिंह कौशल पर फर्जी मेडिकल डिग्रियां तैयार करने और उनके जरिए सरकारी नियुक्तियों में कथित फर्जीवाड़ा करने के गंभीर आरोप हैं। दमोह पुलिस की जांच में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में कथित फर्जी डिग्रियों के आधार पर कुछ लोगों को डॉक्टर के रूप में नियुक्त कराए जाने का मामला सामने आया था।

जांच के दौरान एक दर्जन से अधिक कथित फर्जी डॉक्टरों के नाम सामने आने की बात कही गई थी। वहीं, मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार कार्यालय में भी आरोपी के पंजीयन का रिकॉर्ड नहीं मिलने की जानकारी सामने आई थी।

मामले में कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने हीरा सिंह कौशल को निलंबित कर दिया था। वह फिलहाल जेल में बंद है।

निलंबन और जेल के बावजूद प्रशिक्षण सूची में नाम

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित कर्मचारी निलंबित है और जेल में बंद है, तब भी जिला स्तरीय प्रशिक्षण सूची में उसका नाम किस आधार पर शामिल किया गया।

जारी सूची में उसका पद रेडियोग्राफर और पदस्थापना स्थल बिलकिसगंज दर्ज है। इससे विभागीय रिकॉर्ड को अपडेट करने और कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति का सत्यापन करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रशिक्षण सूची तैयार करने से पहले कर्मचारियों के निलंबन, गिरफ्तारी या पदस्थापन की वर्तमान स्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया गया।

‘लिपिकीय त्रुटि’ बताकर मामला खत्म होगा या तय होगी जिम्मेदारी?

बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले भी अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। अब निलंबित और जेल में बंद कर्मचारी का नाम प्रशिक्षण सूची में सामने आने के बाद विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करता है या इसे महज लिपिकीय त्रुटि बताकर छोड़ दिया जाता है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि सूची में नाम किस स्तर पर अपडेट नहीं हुआ और इसके लिए कौन अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार है। इस संबंध में विभाग का आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति और साफ हो सकेगी।

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