June 15, 2026

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 2005 में हुए बलवा और मारपीट के मामले में आरोपियों को करीब 20 साल बाद राहत मिली है। हाईकोर्ट ने लंबे समय से मामला लंबित रहने और आरोपियों द्वारा पहले ही जेल में बिताई गई अवधि को देखते हुए उनकी सजा को “पहले से भुगती गई सजा” में परिवर्तित कर दिया। साथ ही कोर्ट ने अर्थदंड की राशि जमा करने के निर्देश भी दिए हैं।

मामला ग्राम धाराशिव का है, जहां 7 जुलाई 2005 को विष्णु प्रसाद के घर उनकी दादी हराबाई का वार्षिक श्राद्ध कार्यक्रम आयोजित था। इसी दौरान खेती का काम करने वाले श्रवण राठौर ने बताया कि नेगीराम ने उसे विष्णु प्रसाद का “चापलूस” कहा है। शाम को इस बात को लेकर विष्णु प्रसाद ने नेगीराम से पूछताछ की थी।

इसके बाद रात में गांव की पान दुकान के पास विवाद बढ़ गया। आरोप है कि कई लोग वहां पहुंचे और विष्णु प्रसाद व उनके साथियों पर लाठी, तलवार, कुल्हाड़ी, फरसा, लोहे की रॉड और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचीं महिलाओं — राधाबाई, हीराबाई, उत्तरा बाई और कमलाबाई — को भी चोटें आईं। घटना में कमल राठौर और विनोद को गंभीर चोटें तथा फ्रैक्चर हुआ था।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। अतिरिक्त सत्र न्यायालय जांजगीर ने 17 मार्च 2008 को आरोपियों को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148 और 326/149 के तहत सजा सुनाई थी।

बाद में हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। हाईकोर्ट ने यह माना कि घटना वर्ष 2005 की है और अपील 2008 से लंबित थी। साथ ही आरोपी एक महीने से अधिक समय जेल में बिता चुके थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जेल में बिताई गई अवधि को ही पर्याप्त सजा मान लिया।

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *