बीमा एजेंट के साथ निजी संबंधों से सुरक्षा को खतरा?जगदलपुर (बस्तर): छत्तीसगढ़ में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) एवं ईTPB के कैंपों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं न्यूज़ चैनल को प्राप्त जानकारी और जमीनी अवलोकन के अनुसार, CISF एवं ITBP और ITBP के सुरक्षा घेरे में एक बाहरी महिला की अनधिकृत पहुंच ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ा दी है

प्प्रिया तिवारी ऐसे ही सैकड़ों जवानों को अपने प्रेम में फंसाती है
।क्या है पूरा मामला?मिली जानकारी के अनुसार, ‘प्रिया’ तिवारी नामक एक महिला, जो निजी बीमा (Insurance) क्षेत्र से जुड़ी है, CISF और ITBP के उन प्रतिबंधित कैंपों और चौकियों में आसानी से प्रवेश कर रही है, जहाँ आम नागरिकों का जाना पूरी तरह वर्जित है। यह सीधे तौर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।अधिकारियों और जवानों की संलिप्तता का आरोप:आरोप है कि उक्त महिला ने CISF और ITBP के जवानों से लेकर CISF के एक DIG स्तर के अधिकारियों तक अपनी पैठ बना ली है। चर्चा है कि ‘प्यार’ और ‘निजी संबंधों’ की आड़ में बल के महत्वपूर्ण सुरक्षा पहलुओं, गतिविधियों और मूवमेंट से जुड़ी गोपनीय जानकारियां इस महिला से साझा की जा रही हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति किसी बड़ी साजिश या ‘हनी-ट्रैप’ (Honey-trap) जैसी घटनाओं को न्योता दे सकती है, क्योंकि इन जानकारियों का लाभ असामाजिक तत्वों या बाहरी ताकतों को मिल सकता है।डिजिटल जांच की मांग:पत्रकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय और CISF के महानिदेशक (DG) से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि उक्त महिला के फोन की तकनीकी जांच (CDR और WhatsApp चैट) कराई जाए। दावा किया जा रहा है कि जांच होने पर सैकड़ों CISF कर्मियों के नाम सामने आ सकते हैं, जो बल के अनुशासन और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।जिम्मेदार पत्रकारिता का परिचय:इस गंभीर विषय पर अपनी बात रखते हुए (पत्रकार, ‘) ने कहा, “यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। यदि मेरी सूचना जांच में गलत पाई जाती है, तो मैं किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार हूँ। लेकिन, यदि जांच में सुरक्षा से जुड़ी सेंध और अधिकारियों की मिलीभगत साबित होती है, तो दोषियों पर कठोरतम कार्यवाही होनी चाहिए।
“अब देखना यह होगा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और CISF का मुख्यालय इस संवेदनशील मामले पर क्या कदम उठाता है। क्या बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में तैनात CISF की सुरक्षा में हुई इस चूक के लिए किसी की जवाबदेही तय होगी?
आरव पुरोहित विशेष संवाददाता
