जिले में विवादित राजस्व प्रकरणों के निराकरण की दर में वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- विवादित नामांतरण: वर्ष 2025 में निराकरण दर 68.49 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 94.82 प्रतिशत हो गई।
- विवादित खाता विभाजन: वर्ष 2025 में निराकरण दर 72.53 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 95.70 प्रतिशत हो गई।

प्रशासन के अनुसार, राजस्व पखवाड़ा, पंचायत स्तर पर शिविरों, नियमित सुनवाई और प्रकरणों की सतत मॉनिटरिंग से इन मामलों के निराकरण में तेजी आई है।
सीमांकन के 99.91% और वृक्ष कटाई अनुमति के सभी मामले निराकृत
राजस्व वर्ष 2026 के दौरान जिले में विभिन्न राजस्व सेवाओं के आवेदनों के निराकरण में भी प्रगति दर्ज की गई। प्रमुख सेवाओं की निराकरण दर इस प्रकार रही:
- अविवादित नामांतरण: 92.82 प्रतिशत
- अविवादित खाता विभाजन: 94.10 प्रतिशत
- सीमांकन: 99.91 प्रतिशत
- व्यपवर्तन: 97.49 प्रतिशत
- वृक्ष कटाई की अनुमति: 100 प्रतिशत
- भू-अभिलेख में गलत प्रविष्टि के सुधार: 90.62 प्रतिशत
प्रशासन के मुताबिक, शेष आवेदनों पर भी नियमानुसार सुनवाई कर निराकरण की प्रक्रिया जारी है।
एक साल में 37 हजार से अधिक राजस्व प्रकरण दर्ज
1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक की अवधि में जिले में कुल 37,306 राजस्व प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें से 34,939 मामलों का निराकरण किया गया, जबकि 2,367 प्रकरण लंबित रहे। इस दौरान कुल निराकरण दर 93.66 प्रतिशत रही।
प्रमुख राजस्व प्रकरणों की स्थिति इस प्रकार है:
| प्रकरण का प्रकार | कुल मामले | निराकृत | लंबित |
|---|---|---|---|
| अविवादित नामांतरण | 25,150 | 23,343 | 1,807 |
| अविवादित खाता विभाजन | 3,254 | 3,062 | 192 |
| विवादित नामांतरण | 2,241 | 2,125 | 116 |
| विवादित खाता विभाजन | 768 | 735 | 33 |
| सीमांकन | 2,333 | 2,331 | 2 |
| व्यपवर्तन (ऑटो-डायवर्शन) | 1,632 | 1,591 | 41 |
| वृक्ष कटाई की अनुमति | 51 | 51 | 0 |
| भू-अभिलेख प्रविष्टि सुधार | 1,877 | 1,701 | 176 |
| कुल | 37,306 | 34,939 | 2,367 |
पंचायत अमले ने 14,694 प्रकरणों का किया निराकरण
राजस्व सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने में पंचायत अमले की भी भागीदारी रही। वर्ष 2026 में पंचायत अमले के माध्यम से कुल 15,496 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 14,694 मामलों का निराकरण हुआ। इस तरह निराकरण दर 94.82 प्रतिशत रही।
इनमें अविवादित नामांतरण के 12,629 मामलों में से 11,887 का निराकरण किया गया। वहीं अविवादित खाता विभाजन के 2,867 मामलों में से 2,807 का निस्तारण हुआ।
पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित होने से ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली। इससे तहसील और जिला कार्यालयों तक बार-बार जाने की जरूरत भी कम हुई।
नियमित समीक्षा और विशेष शिविरों से मिली गति
राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के साथ सरपंचों एवं पंचायत सचिवों ने समन्वय से काम किया। विवादित मामलों के लिए विशेष राजस्व शिविर और नियमित सुनवाई आयोजित की गई।
जिला प्रशासन ने समय-सीमा की बैठकों में लंबित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की। आवश्यकता के अनुसार कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए।
प्रशासन का कहना है कि मैदानी अमले की सक्रियता और पंचायत स्तर पर समन्वित प्रयासों से मामलों के निराकरण में तेजी आई है। विवादित प्रकरणों में वैधानिक प्रक्रिया के तहत समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया।
कलेक्टर ने राजस्व सेवाओं को नागरिक केंद्रित बनाने पर दिया जोर
कलेक्टर ने कहा कि राजस्व वर्ष 2026 में विवादित नामांतरण और खाता विभाजन जैसे जटिल मामलों का त्वरित निराकरण विशेष प्राथमिकता रही। उनके अनुसार, विवादित नामांतरण की निराकरण दर 68.49 प्रतिशत से बढ़कर 94.82 प्रतिशत और विवादित खाता विभाजन की दर 72.53 प्रतिशत से बढ़कर 95.70 प्रतिशत होना राजस्व एवं पंचायत अमले की सक्रियता का परिणाम है।
जिला प्रशासन ने आगे भी राजस्व सेवाओं को सरल, सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने तथा ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर अधिक सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास जारी रखने की बात कही है।