छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संतान की चाह रखने वाले मनेंद्रगढ़ के एक दंपती को राहत देते हुए IVF यानी टेस्ट ट्यूब पद्धति से उपचार की अनुमति दे दी है। पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के आधार पर दंपती का आवेदन खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि केवल पति की उम्र के आधार पर चिकित्सकीय रूप से पात्र पत्नी को उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह मामला मनेंद्रगढ़ निवासी अर्चना तिवारी और प्रदीप कुमार तिवारी से जुड़ा है। दंपती करीब 22 साल से संतान की प्रतीक्षा कर रहा है। पत्नी की उम्र लगभग 47 वर्ष और पति की उम्र 57 वर्ष है। हाईकोर्ट ने सभी चिकित्सकीय, नैतिक और कानूनी शर्तें पूरी करने के अधीन उपचार जारी रखने की अनुमति दी है।
55 वर्ष से अधिक उम्र के आधार पर खारिज हुआ था आवेदन
दंपती ने रायपुर स्थित आयुष टेस्ट ट्यूब केंद्र से संपर्क किया था। चिकित्सकीय जांच के बाद अर्चना तिवारी को उपचार के लिए उपयुक्त पाया गया। इसके बाद 24 जून को सक्षम प्राधिकारी से इलाज की अनुमति मांगी गई।
हालांकि, 31 जुलाई को आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि कानून के तहत पुरुष की अधिकतम आयु 55 वर्ष निर्धारित है। इसके बाद दंपती ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने आयु सीमा के प्रावधानों को किया स्पष्ट
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की अदालत ने कहा कि कानून में महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग आयु सीमाएं निर्धारित हैं। पति-पत्नी की संयुक्त उम्र को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है।
अदालत के अनुसार, जब पत्नी आयु संबंधी निर्धारित शर्तों के तहत उपचार के लिए पात्र है, तो केवल पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के आधार पर उसे इलाज से वंचित नहीं किया जा सकता। मामले में पत्नी को चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त पाया गया था और पति की उम्र के अतिरिक्त उपचार रोकने का कोई चिकित्सकीय कारण सामने नहीं आया था।
प्रजनन संबंधी फैसले निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रजनन से जुड़े फैसले व्यक्ति की निजता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित हैं। अदालत ने मामले में लागू आयु सीमा और पत्नी की चिकित्सकीय पात्रता को ध्यान में रखते हुए उपचार की अनुमति देने का निर्णय लिया।
उपचार के दौरान पत्नी की उम्र 50 वर्ष होने पर भी नहीं रुकेगा इलाज
हाईकोर्ट ने 31 जुलाई के आदेश को रद्द करते हुए दंपती को निर्धारित चिकित्सकीय, नैतिक और कानूनी शर्तें पूरी करने पर उपचार जारी रखने की अनुमति दी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उपचार शुरू होने के बाद अर्चना तिवारी की उम्र 50 वर्ष हो जाती है, तो केवल उम्र बढ़ने के आधार पर चल रहे उपचार को बंद नहीं किया जाएगा। हालांकि, इलाज के दौरान सभी चिकित्सकीय और वैधानिक नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
IVF केंद्र को भी मिली राहत
हाईकोर्ट ने उपचार केंद्र को भी राहत देते हुए कहा कि यदि केंद्र अदालत के आदेश के अनुरूप उपचार करता है, तो केवल पति की उम्र के आधार पर उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस फैसले से दंपती को लंबे समय से प्रतीक्षित उपचार का अवसर मिला है। हालांकि, उपचार की प्रक्रिया में सभी लागू चिकित्सकीय और कानूनी शर्तों का पालन आवश्यक रहेगा।