- छत्तीसगढ़ में पराली जलाने के मामले में पहली बार प्रशासन ने पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तहत कार्रवाई की है।
- धमतरी के बागतराई रोड स्थित मणीकंचन केंद्र के लिगेसी वेस्ट प्लांट में 25 मई को लगी आग की जांच के बाद पांच किसानों पर कार्रवाई की गई।
- जांच में आशंका जताई गई कि आसपास के खेतों में पराली जलाने से आग फैलकर कचरा संग्रहण स्थल तक पहुंची।
- नगर निगम की रिपोर्ट और राजस्व विभाग की जांच के आधार पर संबंधित किसानों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया।

- किसानों ने पराली जलाने से इनकार किया, लेकिन उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें जिम्मेदार माना गया।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों के अनुसार दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर 5,000 रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान है।
- इसी नियम के तहत पांचों किसानों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- प्रशासन ने जुर्माने की वसूली के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं और किसानों से फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन की अपील की है।
मुख्य महत्व:
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ में पराली जलाने के खिलाफ प्रशासन की पहली बड़ी दंडात्मक कार्रवाई मानी जा रही है। इसका उद्देश्य पर्यावरण प्रदूषण और आगजनी की घटनाओं को रोकना तथा किसानों को फसल अवशेषों के वैकल्पिक एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना है।