November 5, 2026

नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) का कोर क्षेत्र मानसून सीजन के दौरान 92 दिनों तक बंद रहने के बाद 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए फिर खोल दिया गया है। एक जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहे रिजर्व में नए पर्यटन सत्र के पहले ही दिन पर्यटकों का उत्साह देखने को मिला। मढ़ई, चूरना और पनारपानी जैसे प्रमुख प्रवेश द्वारों पर पर्यटकों का स्वागत कर सफारी सत्र की शुरुआत की गई।

पहले दिन सभी 20 जिप्सियों की एडवांस बुकिंग फुल

नए पर्यटन सत्र के पहले दिन जंगल सफारी के लिए उपलब्ध सभी 20 जिप्सियों की एडवांस बुकिंग फुल रही। ऑनलाइन बुकिंग के जरिए कुल 154 पर्यटकों ने सतपुड़ा के जंगलों में सफारी का आनंद लिया। पर्यटकों की अच्छी संख्या से रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों की शुरुआत उत्साहपूर्ण रही।

मढ़ई गेट पर ग्रामीण बेटियों ने किया पर्यटन सत्र का शुभारंभ

मढ़ई गेट पर ‘सतपुड़ा साथी’ समूह की ग्रामीण बेटियों ने फीता काटकर नए पर्यटन सत्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर एसटीआर की डिप्टी डायरेक्टर ऋषिभा नेताम, सहायक संचालक शिव प्रसाद मैथानी और स्थानीय अधिकारियों ने पर्यटकों का तिलक लगाकर, पुष्पगुच्छ भेंट कर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया।

पनारपानी-नीमघान गेट पर भी पर्यटकों से फीता कटवाकर सत्र की शुरुआत की गई। यहां इको विकास समिति बारीआम की अध्यक्ष सरजू बाई ने हरी झंडी दिखाकर सफारी वाहनों को रवाना किया। वहीं, चूरना गेट पर वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यटकों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

अगले आठ महीने पर्यटक कर सकेंगे जंगल सफारी

एसटीआर क्षेत्र संचालक राखी नंदा ने बताया कि सफारी संचालन और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अब अगले आठ महीनों तक पर्यटक सतपुड़ा की प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ पक्षियों और वन्यजीवों को करीब से देख सकेंगे।

मानसून के दौरान बंद रहने के बाद कोर क्षेत्र खुलने से पर्यटकों को जंगल सफारी का अवसर मिलेगा। पार्क प्रबंधन ने पर्यटन सत्र के लिए व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।

पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ ‘नन्हीं की आवाज’ साइकिल अभियान शुरू

पर्यटन सत्र की शुरुआत के साथ ही पार्क प्रबंधन ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘नन्हीं की आवाज’ साइकिल अभियान भी शुरू किया। अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर अभियान को रवाना किया। इस पहल के जरिए प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया गया।

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