November 5, 2026

इंदौर। जिला न्यायालय ने आत्महत्या के लिए उकसाने और अवैध सूदखोरी से जुड़े मामले में चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए सुसाइड नोट और अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। मामला शिप्रा थाना क्षेत्र का है, जहां मोटरसाइकिल शोरूम संचालक मनोज पटेल की आत्महत्या के करीब 45 दिन बाद उनके परिजनों ने पुलिस को एक सुसाइड नोट और हिसाब-किताब की डायरी सौंपी थी।

आरोपी पक्ष की ओर से पेश दलीलों और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही, मृतक के परिजनों की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका भी खारिज कर दी।

क्या था पूरा मामला?

हाईकोर्ट अधिवक्ता के.के. कुन्हारे के अनुसार, 30 जून 2021 को मोटरसाइकिल शोरूम संचालक मनोज पटेल ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद शिप्रा पुलिस ने मामला दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की और पोस्टमार्टम कराया।

इसके करीब 45 दिन बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को हिसाब-किताब की एक डायरी और एक पन्ने का सुसाइड नोट सौंपा। इस नोट के आधार पर पुलिस ने दीपक जायसवाल, माखन, अनिल और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अवैध सूदखोरी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था।

सुसाइड नोट के हस्ताक्षरों पर उठे सवाल

अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने सुसाइड नोट पर किए गए हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की दलील थी कि मनोज पटेल अपने आधिकारिक और निजी दस्तावेजों पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते थे, जबकि पुलिस को सौंपे गए सुसाइड नोट पर हिंदी में हस्ताक्षर किए गए थे।

इसके बाद अदालत के निर्देश पर मृतक की लिखावट के अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन परिजन उन्हें उपलब्ध नहीं करा सके। बाद में पुलिस ने मनोज पटेल के शोरूम से वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के हायर परचेज एग्रीमेंट की मूल प्रतियां जब्त कीं। इन दस्तावेजों पर मनोज पटेल के अंग्रेजी में किए गए हस्ताक्षर मौजूद थे।

भोपाल की फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में मिली भिन्नता

सुसाइड नोट और अन्य दस्तावेजों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया। रिपोर्ट के अनुसार, सुसाइड नोट पर किए गए हस्ताक्षरों में अन्य दस्तावेजों के हस्ताक्षरों से काफी भिन्नता पाई गई और उन्हें संदेहास्पद बताया गया।

इसके अलावा, पुलिस द्वारा जब्त किए गए मृतक के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में भी आरोपियों के साथ पैसों के लेनदेन, दबाव या प्रताड़ना से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई।

साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपी दोषमुक्त

फॉरेंसिक रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद इंदौर जिला न्यायालय ने सुसाइड नोट की विश्वसनीयता को स्वीकार नहीं किया और चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

अदालत ने मृतक के परिजनों की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका भी खारिज कर दी। इस फैसले के साथ आत्महत्या के लिए उकसाने और अवैध सूदखोरी से जुड़े इस मामले में आरोपियों को न्यायालय से राहत मिली।

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