November 5, 2026

मुंबई: मध्यप्रदेश को रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया केम 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए देश-विदेश के निवेशकों से मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश के लिए सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल व्यवस्था तैयार की गई है। सरकार निवेशकों को हर जरूरी सुविधा, सहयोग और सुरक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2040 तक रसायन और उर्वरक क्षेत्र से जुड़े व्यावसायिक कारोबार को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। पेट्रोकेमिकल्स, पेट्रो पॉलिमर्स, उर्वरक, विभिन्न रसायनों और दवाओं के निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने उद्योगपतियों और निवेशकों को वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का न्योता भी दिया। इस वर्ष इंडिया केम की थीम ‘एडवांटेज भारत – एन इमर्जिंग ग्लोबल केमिकल्स हब’ रखी गई है। आयोजन में मध्यप्रदेश के साथ आंध्रप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल स्टेट पार्टनर के रूप में शामिल हुए हैं।

बीना बनेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग का नया केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सागर जिले का बीना मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल उद्योग का नया गढ़ बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीना में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट का भूमिपूजन कर चुके हैं। इस परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार होने की संभावना है।

उन्होंने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की करीब 49 हजार करोड़ रुपये की एथिलीन क्रैकर और रिफाइनरी विस्तार परियोजना का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे मध्य भारत में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर बनेंगे। उन्होंने इंडियन ऑयल, रिलायंस और हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स जैसी कंपनियों से बीना के आसपास पॉलिमर प्रसंस्करण और वितरण की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मझोले उद्योगों को भी बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए पॉलिमर प्रोसेसिंग का मजबूत क्लस्टर विकसित करने की योजना है।

तामोट और बिलौआ में प्लास्टिक पार्क, धार में पीएम मित्र पार्क

मुख्यमंत्री ने बताया कि रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर जिले के बिलौआ में 93 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक प्लास्टिक पार्क तैयार किए गए हैं। तामोट में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) का उन्नत प्लास्टिक उत्पाद अनुकरण एवं मूल्यांकन केंद्र भी स्थापित है।

धार में विकसित हो रहे पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क से कपड़ा उद्योग के साथ पॉलिमर, केमिकल और सहायक उद्योगों को भी अवसर मिलेंगे। उन्होंने विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे का जिक्र करते हुए बताया कि यहां दो गैस प्रसंस्करण इकाइयां हैं। इसके अलावा 10 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 4.3 टन है।

सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना और नागदा में ग्रासिम इंडस्ट्रीज के औद्योगिक परिसर को भी उन्होंने प्रदेश की औद्योगिक क्षमता का उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने देवास में प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल परियोजना का भी उल्लेख किया।

कृषि रसायन और स्पेशियलिटी केमिकल कंपनियों को निवेश का न्योता

मुख्यमंत्री ने यूपीएल, पीआई इंडस्ट्रीज, धनुका और सिंजेंटा जैसी कंपनियों से मध्यप्रदेश को केवल बाजार के रूप में नहीं, बल्कि विनिर्माण केंद्र के तौर पर भी चुनने का आग्रह किया। उन्होंने दीपक नाइट्राइट और आरती इंडस्ट्रीज से स्पेशियलिटी केमिकल क्षेत्र में नई इकाइयां लगाने और मौजूदा कारोबार के विस्तार की संभावनाएं तलाशने को कहा।

इसके साथ ही बीएएसएफ, डाउ, आर्केमा, लैनक्सेस और मित्सुबिशी केमिकल जैसी वैश्विक कंपनियों से भी प्रदेश में निवेश की संभावनाओं का आकलन करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने निर्यातकों और केमेक्सिल के साथ संवाद के जरिए निर्यातोन्मुख उद्योगों को बढ़ावा देने की मंशा जताई।

निवेश के लिए मध्यप्रदेश की ये खूबियां गिनाईं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति उसकी सबसे बड़ी ताकत है। देश के मध्य में होने के कारण यहां से विभिन्न बाजारों तक पहुंच आसान है। उन्होंने बताया कि पिछले पौने तीन वर्षों में प्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं।

निवेशकों को उपलब्ध सुविधाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में रियायती दरों पर लीज पर औद्योगिक भूमि, पर्याप्त जल संसाधन, सरप्लस बिजली, प्लग एंड प्ले औद्योगिक क्षेत्र, 5 लाख किलोमीटर से अधिक का सड़क नेटवर्क, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो और प्रशिक्षित श्रमशक्ति उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच भारत के पेट्रोकेमिकल और रसायन क्षेत्र में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। देश 170 से अधिक देशों को पेट्रोकेमिकल और ऑर्गेनिक उत्पादों का निर्यात कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में रसायन और पेट्रोकेमिकल उत्पादन में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बढ़ा पेट्रोकेमिकल बाजार: CM

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में भारत का पेट्रोकेमिकल बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था, जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में तेजी आई है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पेट्रोकेमिकल सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते की दिशा में हो रही पहल के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति शृंखला में अस्थिरता के बीच चुनौतियां और अवसर दोनों मौजूद हैं। ऐसे समय में आधुनिक तकनीक और ठोस योजनाओं के साथ पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश करना जरूरी है। मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

2040 तक केमिकल उद्योग को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि इंडिया केम 2026 में होने वाला विचार-विमर्श देश के पेट्रोकेमिकल और केमिकल उद्योग को आगे बढ़ाने में मददगार होगा। केंद्र सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें जमीन पर लागू करने में राज्य सरकारों की भूमिका अहम होती है।

उन्होंने बताया कि भारत की पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री का आकार वर्तमान में करीब 220 अरब डॉलर है। सरकार ने वर्ष 2040 तक इसे 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के साथ देश का पेट्रोकेमिकल और रसायन उद्योग 1.6 ट्रिलियन डॉलर से आगे ले जाने की परिकल्पना है।

नड्डा ने कहा कि भव्य रसायन पार्कों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार प्रति पार्क 1,000 करोड़ रुपये की सहायता देने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना को बजट में शामिल किया गया है। रसायन पार्कों के विकास के लिए जरूरी पर्यावरणीय स्वीकृतियां दिलाने में भी केंद्र सरकार सहयोग करेगी।

शोध, प्रशिक्षण और टिकाऊ रसायनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एडवांस पेट्रोकेमिकल और केमिकल सेक्टर में शोध एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के फंड डेवलपमेंट का प्रावधान किया गया है। नीति आयोग ने भी पेट्रोकेमिकल और केमिकल क्षेत्र को प्रमुख सेक्टरों में शामिल किया है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों को कर्मचारियों के प्रशिक्षण, दुर्घटनाओं की रोकथाम और टिकाऊ रसायनों के निर्माण पर ध्यान देना होगा। कार्बन उत्सर्जन घटाना भी जरूरी है। भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक उपयोग करीब 15 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह 43 से 80 किलोग्राम तक बताया जाता है। ऐसे में प्लास्टिक क्षेत्र के विकास के साथ इसके उपयोग और प्रबंधन की संतुलित व्यवस्था भी जरूरी है।

नड्डा ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश के 1.4 अरब नागरिकों और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश भी पढ़कर सुनाया।

इंडिया केम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल

उद्घाटन सत्र को केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने भी संबोधित किया। गुजरात के राज्य मंत्री प्रफुल्ल छगनभाई पंशेरिया और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के सचिव तेजवीर सिंह ने भी अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में फिक्की की ओर से तीनों मुख्यमंत्रियों को ग्रीन सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। इस दौरान फिक्की और ईवाई की ओर से तैयार नॉलेज पेपर का विमोचन भी हुआ।

सत्र में एचएमईएल मित्तल एनर्जी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रभ दास, यूपीएल के अध्यक्ष एवं समूह मुख्य कार्यपालन अधिकारी जय श्रॉफ, रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक निखिल आर. मेसवानी और द सैनमार ग्रुप के अध्यक्ष विजय शंकर सहित उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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