राजनांदगांव/डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में रसोई गैस सिलेंडरों से कथित गैस चोरी और हेराफेरी का मामला सामने आया है। शहर के बाहर एक सुनसान मैदान में सिलेंडरों से भरी मालवाहक गाड़ी के पास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर एसडीएम और फूड इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक जांच के बाद वाहन को गैस एजेंसी ले जाया गया और पंचनामा कार्रवाई की गई। इस दौरान मौके पर मौजूद चार लोग फरार हो गए।

मामला इंडेन कंपनी की प्रॉमिनेंट फ्यूल सेंटर गैस एजेंसी से जुड़ा है। खास बात यह है कि क्षेत्र के उपभोक्ता लंबे समय से सिलेंडरों में कम गैस मिलने की शिकायत कर रहे थे। ऐसे में इस कार्रवाई के बाद गैस वितरण व्यवस्था और एजेंसी की निगरानी प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
सुनसान मैदान में सिलेंडरों से भरी गाड़ी के पास मिली संदिग्ध गतिविधियां
जानकारी के मुताबिक, शहर से बाहर आदर्श नगर और भूरवा टोला के बीच स्थित एक सुनसान मैदान में सिलेंडरों से लदी मालवाहक गाड़ी के आसपास कुछ लोग मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने उनसे पूछताछ की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्रशासन को सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद एसडीएम और फूड इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जांच के बाद वाहन को गैस एजेंसी पहुंचाया और पंचनामा तैयार कराया। कार्रवाई के दौरान चार लोगों के मौके से फरार होने की बात सामने आई है।
कम गैस मिलने की पुरानी शिकायतों ने बढ़ाई चिंता
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सिलेंडरों में कम गैस मिलने की शिकायत कर रहे थे। आरोप है कि शिकायत करने पर उपभोक्ताओं से ही सबूत लाने को कहा जाता था। अब इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि पहले मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और वितरण के लिए निकलने वाले सिलेंडरों की नियमित निगरानी किस तरह होती थी।
संदेह के घेरे में आए लोग गैस एजेंसी में सिलेंडर वितरण का काम करते थे। बताया जा रहा है कि उन्हें करीब तीन महीने पहले काम पर रखा गया था और वे राजस्थान के रहने वाले हैं। यह दावा भी किया जा रहा है कि एजेंसी के जिम्मेदारों को इन श्रमिकों के नाम तक की जानकारी नहीं थी। हालांकि, इन सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सिलेंडरों का वजन और स्टॉक रिकॉर्ड जांचना जरूरी
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या सिलेंडरों का वजन कराया गया और क्या उनमें गैस की निर्धारित मात्रा से कमी पाई गई? इसके अलावा, मौके से गैस की हेराफेरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण या अन्य सामग्री बरामद हुई या नहीं, इसकी जानकारी भी सामने आना बाकी है।
जांच में सिलेंडरों का वजन, एजेंसी का स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, वाहन से जुड़े दस्तावेज और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। इससे पता चल सकेगा कि गैस की मात्रा में वास्तव में कोई कमी की गई थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो इसमें कौन-कौन शामिल था।
गैस के अवैध स्थानांतरण पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
LPG (Regulation of Supply and Distribution) Order, 2000 के तहत निर्धारित अनुमति के बिना एक सिलेंडर से दूसरे सिलेंडर में गैस स्थानांतरित करना प्रतिबंधित है। यदि जांच में गैस चोरी, अवैध स्थानांतरण या संबंधित नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
ऐसे में केवल पंचनामा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होगा। जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कितने सिलेंडरों की जांच की गई, गैस की कमी मिली या नहीं और इस मामले में कौन-से साक्ष्य जुटाए गए हैं।
एजेंसी मालिक ने FIR कराने की कही बात
गैस एजेंसी के मालिक विवेक वासनिक ने संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है या नहीं। चार फरार लोगों की पहचान और उनकी तलाश को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
फूड इंस्पेक्टर ने उच्च अधिकारियों से संपर्क करने को कहा
मामले में खाद्य विभाग की कार्रवाई और जांच की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जब फूड इंस्पेक्टर से कैमरे पर आधिकारिक पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने बयान देने से इनकार करते हुए उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की बात कही।
हालांकि, जांच के दौरान सभी जानकारियां तत्काल सार्वजनिक करना संभव नहीं होता, लेकिन उपभोक्ताओं के हित से जुड़े इस मामले में प्रशासन को जांच की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सिलेंडरों की जांच, वजन, जब्त दस्तावेज और आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आने से लोगों की शंकाओं का समाधान हो सकेगा।
फिलहाल, डोंगरगढ़ में सामने आए इस मामले में मुख्य सवाल यही है कि क्या उपभोक्ताओं को वास्तव में कम गैस मिल रही थी और क्या वितरण व्यवस्था के भीतर गैस की हेराफेरी की जा रही थी? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने और साक्ष्य सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।