रायपुर। राजधानी से लगे चंडी गांव में किसानों के लिए प्रस्तावित फूड पार्क की 24 एकड़ जमीन पर मुरुम खनन का मामला सामने आया है। नवीन फूड पार्क के लिए आवंटित खसरा नंबर 414/2 की 9.48 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर कथित तौर पर दिनदहाड़े खुदाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां से रोजाना 40 से 50 गाड़ियां मुरुम भरकर निकल रही हैं। एक ओर फूड पार्क की योजना लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पाई है, वहीं दूसरी ओर जमीन पर लगातार खुदाई होने के आरोप हैं।

जहां बननी थीं सुविधाएं, वहां हो रही खुदाई
फूड पार्क की इस जमीन पर कोल्ड स्टोरेज, गोदाम और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की इकाइयां विकसित करने की योजना थी। इसका उद्देश्य किसानों की फल-सब्जियों और अन्य उपज का सुरक्षित भंडारण, मूल्य संवर्धन और बर्बादी रोकना था। इससे स्थानीय किसानों को रोजगार और अपनी उपज के बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद थी।
लेकिन मौके पर पहुंची लल्लूराम डॉट कॉम की टीम को जमीन पर खुदाई और बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दिए। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां से बड़ी संख्या में वाहन मुरुम लेकर निकलते हैं। ऐसे में फूड पार्क के लिए प्रस्तावित जमीन के उपयोग और उसकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकारी जमीन को उसके आवंटित उद्देश्य के अनुरूप सुरक्षित रखना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने एनआरडीए और खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि पंचायत स्तर पर यहां खुदाई कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
ग्रामीणों के मन में सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहन निकलने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। क्या जमीन पर हो रही खुदाई की अनुमति है या यह अवैध खनन है? इसकी स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई की बात कही
मामले पर एनआरडीए के सीई बीआर अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि आवंटित जमीन पर खनन हो रहा है तो कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे।
वहीं, रायपुर खनन विभाग के उप संचालक राजेश मालवे ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई के लिए तत्काल टीम भेजी गई है। जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फूड पार्क की योजना पर भी सवाल
चंडी की यह जमीन किसानों के लिए प्रस्तावित फूड पार्क का अहम हिस्सा है। ऐसे में यहां हो रही खुदाई के आरोपों के बीच परियोजना की प्रगति और जमीन की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फूड पार्क की योजना अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतर पाई? आवंटित सरकारी भूमि पर कथित खनन को रोकने के लिए पहले प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
अब यह देखना होगा कि संबंधित विभागों की जांच में क्या सामने आता है और जमीन पर मुरुम निकालने की गतिविधियों के संबंध में क्या कार्रवाई की जाती है। किसानों के हित में प्रस्तावित परियोजना की जमीन को सुरक्षित रखने और उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर है।