सिंगरौली। जिले के खुटार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल की छत और सीढ़ियों के पास कार्टूनों व बोरियों में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं पड़ी मिली हैं। सरकारी फंड से मरीजों के इलाज के लिए खरीदी गई इन दवाओं का समय पर इस्तेमाल नहीं हो सका और वे एक्सपायर हो गईं। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और दवा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

2024 से 2026 तक की एक्सपायरी डेट वाली दवाएं मिलीं
जांच के दौरान मिली दवाओं में जीवन रक्षक टैबलेट, एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर, ORS और सिरप समेत कई तरह की दवाएं शामिल बताई जा रही हैं। इन पर वर्ष 2024 से लेकर 2026 तक की एक्सपायरी डेट दर्ज है।
सवाल यह है कि जब अस्पताल में दवाओं का स्टॉक रजिस्टर बनाए रखने की व्यवस्था है, तो एक्सपायरी के करीब पहुंच चुकी दवाओं का समय रहते वितरण क्यों नहीं किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं का अस्पताल परिसर में पड़े रहना दवा भंडारण और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
मीडिया में मामला आने के बाद CMHO ने दिए निस्तारण के निर्देश
मामला सामने आने के बाद सिंगरौली के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) पुष्पराज सिंह ने कहा कि अस्पताल परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि तस्वीरें सामने आने के बाद बीएमओ से बात कर दवाओं के तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, केवल एक्सपायरी दवाओं को हटाना इस पूरे मामले का समाधान नहीं माना जा सकता। जरूरत इस बात की है कि यह पता लगाया जाए कि दवाओं की खरीदी, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया में आखिर कहां चूक हुई।
दवाएं मंगाई क्यों गईं और मरीजों तक क्यों नहीं पहुंचीं?
स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि:
- इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं की मांग और खरीदी क्यों की गई?
- दवाएं मरीजों को समय पर वितरित क्यों नहीं हुईं?
- स्टॉक रजिस्टर में दवाओं की नियमित निगरानी हुई या नहीं?
- एक्सपायरी डेट नजदीक आने के बावजूद दवाओं के इस्तेमाल की योजना क्यों नहीं बनाई गई?
- एक्सपायरी दवाओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले ही अलग क्यों नहीं किया गया?
यदि जांच में जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकारी धन से खरीदी गई दवाओं का समय पर उपयोग न होना न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि यह मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।