रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्य कर (GST) विभाग में वर्ष 2022 में हुई सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा को निरस्त किए जाने के बाद इस मामले पर सियासत तेज हो गई है। डिप्टी सीएम अरुण साव ने विभागीय कार्रवाई को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति से जोड़ा है, जबकि PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई और मामले में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।

GST विभाग की परीक्षा क्यों हुई निरस्त?
राज्य कर विभाग ने लिपिक वर्ग के कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर नियुक्त करने के लिए 26 जून 2022 को आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षा को शून्य घोषित कर दिया है। विभागीय जांच में परीक्षा से लेकर मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया तक कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
जांच में आरक्षण रोस्टर, परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजी, समेकित परिणाम और अंक तालिका, उत्तर-पुस्तिकाओं की कोडिंग तथा पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी खामियों का उल्लेख है। कुछ चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे उत्तर पाए जाने की बात भी जांच रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।
42 कर्मचारियों को मूल पद पर लौटना होगा
विभाग की कार्रवाई का असर परीक्षा के जरिए वाणिज्यिक कर निरीक्षक बने कर्मचारियों पर पड़ा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार 42 प्रभावित कर्मचारियों को उनके उस मूल पद और मूल पदस्थापना पर वापस लौटना होगा, जहां वे निरीक्षक पद पर नियुक्ति से पहले कार्यरत थे।
राज्य कर आयुक्त कार्यालय ने 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर परीक्षा और उसके आधार पर हुई चयन प्रक्रिया को निरस्त किया। इसके साथ ही 2022 में जारी नियुक्ति आदेश को भी रद्द कर दिया गया है।
अरुण साव बोले- जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई होगी
परीक्षा निरस्त किए जाने पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी।
अरुण साव ने इसे पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जोड़ते हुए युवाओं के साथ अन्याय और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने के आरोप भी लगाए। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
दीपक बैज ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो सरकार जांच करा सकती है और उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।
बैज ने CGPSC से जुड़े मामलों का भी जिक्र करते हुए सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह की कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले की जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी थी तो कार्रवाई में इतना समय क्यों लगा।
जांच रिपोर्ट के बाद पूरी प्रक्रिया हुई निरस्त
विभागीय जांच समिति ने 3 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में परीक्षा और चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। विभाग ने इन परिस्थितियों में केवल कुछ अभ्यर्थियों के परिणामों में बदलाव करने के बजाय पूरी परीक्षा और उसके आधार पर हुई चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद अब मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। एक ओर सरकार इसे अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, वहीं कांग्रेस कार्रवाई में हुई देरी और सरकार के रुख पर सवाल उठा रही है।