रायपुर। प्रयास विद्यालय, रायपुर में कक्षा 9वीं के एक छात्र को टीसी देकर विद्यालय से बाहर किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी को छात्र की टीसी निरस्त करने और उसकी पढ़ाई जारी रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

छात्र को टीसी देने पर पालक ने उठाए सवाल
मामले को लेकर छात्र के पालक की ओर से आयोग में आवेदन प्रस्तुत किया गया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि छात्र को विद्यालय से निष्कासित कर टीसी जारी कर दी गई। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि छात्र के तंत्र क्रिया में कथित रूप से संलिप्त होने के आरोप के चलते उसके खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
हालांकि, छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने संबंधी आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पालक का आरोप है कि उन्हें समुचित जानकारी दिए बिना छात्र को कक्षा से बाहर कर टीसी प्रदान कर दी गई। इसके बाद उन्होंने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बाल आयोग से जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
बाल आयोग ने धारा 13(1)(ज) और 14 के तहत लिया संज्ञान
आवेदन का अवलोकन करने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत प्रकरण दर्ज करते हुए मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर को मामले की विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक एवं लिखित प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
छात्र की टीसी निरस्त करने के निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास से दूरभाष पर चर्चा कर मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। आयोग की ओर से छात्र की टीसी निरस्त करने और उसकी पढ़ाई दोबारा जारी रखने के संबंध में आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच और अंतिम निराकरण की प्रक्रिया के दौरान छात्र के शैक्षणिक हित प्रभावित नहीं होने चाहिए और उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रहनी चाहिए।
21 सितंबर को प्राचार्य और अधीक्षक होंगे पेश
मामले की विस्तृत जांच के लिए प्रयास विद्यालय, रायपुर के प्राचार्य और अधीक्षक को आयोग की आपातकालीन खंडपीठ के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर संबंधित दस्तावेज और अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा।
आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देशित किया है कि प्रकरण के अंतिम निराकरण तक छात्र की शिक्षा और उसके शैक्षणिक हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।