ग्वालियर। किसानों के लिए जरूरी खाद की बड़ी मात्रा बारिश के पानी से खराब होने के खतरे में है। मामला ग्वालियर के पुतलीघर स्थित राज्य विपणन संघ मर्यादित के भंडार केंद्र का है। गोदाम की टीन शेड जर्जर और कई जगह से क्षतिग्रस्त बताई जा रही है। इसके चलते बारिश का पानी अंदर पहुंच रहा है और गोदाम में रखी खाद की बोरियां भीग रही हैं।

बारिश से बचाने पॉली कवर का सहारा
गोदाम की तस्वीरों में कई खाद की बोरियां पानी से भीगी हुई दिखाई दे रही हैं। हजारों क्विंटल खाद को बारिश से बचाने के लिए बोरियों को पॉली कवर से ढका गया है।
जमीनी पड़ताल के दौरान गोदाम की स्थिति को लेकर पल्लेदारों और मजदूरों ने भी चिंता जताई। उनका कहना है कि अगर समय रहते टीन शेड की मरम्मत करा दी जाए तो बारिश के दौरान खाद को भीगने से बचाया जा सकता है। इससे किसानों को भी राहत मिलेगी और खाद के नुकसान का खतरा कम होगा।
गोदाम प्रभारी बोले- हर साल होता है मेंटेनेंस
वहीं, गोदाम प्रभारी मनीष चौधरी ने व्यवस्थाओं को लेकर अलग पक्ष रखा है। उनका दावा है कि हर साल बारिश से पहले गोदाम का मेंटेनेंस कराया जाता है और फिलहाल व्यवस्था ठीक है।
उनके मुताबिक गोदाम में इस समय करीब 70 से 80 हजार खाद की बोरियां रखी हुई हैं। जहां पानी टपकने की संभावना रहती है, वहां बोरियों को प्लास्टिक से कवर कर दिया जाता है।
‘सड़क किनारे होने से पत्थर फेंकते हैं असामाजिक तत्व’
टीन शेड के क्षतिग्रस्त होने की वजह बताते हुए मनीष चौधरी ने कहा कि गोदाम सड़क किनारे स्थित है। उनके मुताबिक कुछ असामाजिक तत्व ऊपर पत्थर फेंक देते हैं, जिससे टीन शेड में छेद हो जाते हैं और बारिश का पानी अंदर आने लगता है।
हालांकि, गोदाम में खाद की बड़ी मात्रा रखे होने के बीच इस तरह की स्थिति को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पॉली कवर से कितनी सुरक्षित रहेगी खाद?
गोदाम में खाद की बोरियों को पॉली कवर से ढककर बारिश से बचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि लगातार बारिश की स्थिति में यह व्यवस्था कितनी कारगर साबित होगी।
अगर टीन शेड से पानी लगातार अंदर आता रहा तो खाद के खराब होने की आशंका बनी रह सकती है। वहीं, यदि शेड को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने की बात सही है, तो गोदाम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रशासन के एक्शन का इंतजार
एक तरफ मजदूर और पल्लेदार जर्जर टीन शेड की मरम्मत की जरूरत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ गोदाम प्रभारी का दावा है कि मेंटेनेंस कराया जाता है और खाद को पॉली कवर से सुरक्षित किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि जर्जर शेड की स्थायी मरम्मत कब होगी और बारिश से खाद को सुरक्षित रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना होगा।