September 13, 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति पर लगी रोक हटा दी है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी अधिकारी को ऊंचे पद का प्रभार पाने का कानूनी अधिकार नहीं मिलता।

कोर्ट की ओर से याचिका खारिज किए जाने की स्थिति को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का आग्रह किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही रामेश्वर जायसवाल के प्रभारी DEO के रूप में काम करने का रास्ता साफ हो गया।

क्या है पूरा मामला?

बिलासपुर में पदस्थ प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा और कामेश्वर बैरागी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिलासपुर जिले में 100 से अधिक प्राचार्य ऐसे हैं, जो प्रभारी DEO नियुक्त किए गए रामेश्वर जायसवाल से करीब 18 साल या उससे अधिक वरिष्ठ हैं।

याचिका में सवाल उठाया गया था कि इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने कुछ महीने पहले पदोन्नत हुए प्राचार्य (एलबी) रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार दे दिया।

सीनियर अधिकारियों की CR लिखने पर भी उठाए सवाल

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि राज्य सरकार के एक सर्कुलर के मुताबिक किसी जूनियर अधिकारी को अपने से वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर पदस्थ नहीं किया जा सकता। खास तौर पर तब, जब जूनियर अधिकारी को वरिष्ठ अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (CR) लिखने की स्थिति में रखा जा रहा हो।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रामेश्वर जायसवाल की प्रभारी DEO के रूप में नियुक्ति पर रोक लगा दी थी।

शासन ने कहा- प्रभार देना अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था

सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि किसी पद का प्रभार देना एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी अधिकारी को उस पद का प्रभार देने की बाध्यता नहीं है।

शासन की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि जब तक किसी कानून या नियम में यह अनिवार्य न हो कि किसी पद का प्रभार केवल वरिष्ठ अधिकारी को ही दिया जाएगा, तब तक सिर्फ वरिष्ठता के आधार पर उस पद पर नियुक्ति का कानूनी अधिकार नहीं बनता।

इन दलीलों के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज किए जाने की स्थिति स्पष्ट की। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

गरियाबंद DEO मामले में भी आ चुका है ऐसा फैसला

बता दें कि गरियाबंद के प्रभारी DEO राजेश चंद्राकर की नियुक्ति से जुड़े मामले में भी हाईकोर्ट इसी तरह की टिप्पणी कर चुका है। वहां जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO या BEO बनाए जाने को शासन की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा माना गया था।

हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर हस्तक्षेप नहीं करने की बात कहते हुए गरियाबंद में जूनियर अधिकारी को प्रभारी DEO बनाए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी।

बिलासपुर के मामले में भी याचिका वापस लिए जाने के बाद रामेश्वर जायसवाल के प्रभारी DEO के रूप में काम करने का रास्ता साफ हो गया है।

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