September 23, 2026

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गांव के करीब भालू छोड़े जाने को लेकर देर रात ग्रामीणों और वन विभाग के बीच विवाद की स्थिति बन गई। मरदेल गांव से करीब 500 मीटर दूर भालू छोड़े जाने की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग की तीन गाड़ियों को रोककर विरोध जताया।

ग्रामीणों का कहना था कि बस्ती के इतने करीब भालू छोड़े जाने से लोगों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से भालू से संभावित खतरे और सुरक्षा इंतजामों को लेकर जानकारी मांगी।

रानीमाई जंगल से रेस्क्यू किया गया था भालू

जानकारी के मुताबिक, बालोद वन परिक्षेत्र के रानीमाई जंगल में एक अस्वस्थ भालू का रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद उसे इलाज के लिए रायपुर के जंगल सफारी भेजा गया। उपचार के बाद भालू के स्वस्थ होने पर वन विभाग की टीम सोमवार रात उसे डौंडी वन परिक्षेत्र के मरदेल गांव के पास लेकर पहुंची।

वन विभाग की टीम ने भालू को बस्ती से करीब 500 मीटर की दूरी पर जंगल में छोड़ दिया। इसकी जानकारी ग्रामीणों को मिली तो वे मौके पर जुट गए और वन विभाग की टीम की गाड़ियों को रोक लिया।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

ग्रामीणों ने अधिकारियों से पूछा कि गांव के इतने करीब भालू छोड़े जाने के बाद लोगों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसके बाद नाराजगी बढ़ गई।

जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी ने संभाला मोर्चा

मामले की जानकारी मिलने के बाद जनपद सदस्य तुलेश्वर हिचामी मरदेल पहुंचे। उन्होंने डौंडी रेंजर जीवन भोंडेकर से फोन पर बातचीत की।

बताया गया कि रेंजर ने भालू को छोड़े जाने की जिम्मेदारी बालोद रेंजर और अन्य अधिकारियों पर डाल दी। इसके बाद ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई। मौके पर गुरुर रेंजर चंद्रशेखर भंडारी, बालोद रेंजर सरोज कुमार और दल्लीराजहरा रेंजर संतोष ठाकुर मौजूद थे।

वहीं, क्षेत्रीय रेंजर जीवन भोंडेकर के मौके पर मौजूद नहीं होने को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और उनके खिलाफ नारेबाजी की।

SDO किशोरी साहू ने दिया लिखित आश्वासन

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बालोद वन विभाग के SDO किशोरी साहू देर रात मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों और जनपद सदस्य से चर्चा कर स्थिति को शांत कराया।

SDO ने लिखित आश्वासन दिया कि मंगलवार को पिंजरा लगाकर भालू को पकड़ा जाएगा और उसे किसी अन्य स्थान पर ले जाया जाएगा। इसके साथ ही गांव में पांच वनकर्मियों की तैनाती और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में वन विभाग की जिम्मेदारी होने की बात कही गई।

आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों का विरोध शांत हुआ और वे वापस लौट गए। मौके पर दल्लीराजहरा थाना प्रभारी सुनील तिर्की, डौंडी थाना स्टाफ और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

रात में पांच वनकर्मियों की लगाई गई ड्यूटी

ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने रात के समय गांव में पांच कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई। इनमें सागर मंडावी, गीतेश यादव, रविशंकर निषाद, युगल किशोर सोनबरसा और रण सिंह नायक शामिल हैं।

वनकर्मियों को क्षेत्र की निगरानी और भालू की गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

जंगल जाने से बचने की अपील

वन विभाग ने ग्रामीणों से अनावश्यक रूप से जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की है। विभाग ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

वन विभाग के अनुसार, जल्द ही भालू को पकड़कर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर ले जाने की कार्रवाई की जाएगी।

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