September 23, 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए कथित फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की जांच में एसटीएफ (STF) को कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच आगे बढ़ाते हुए STF ने दो और संदिग्धों को हिरासत में लिया है। दोनों से पूछताछ के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी कार्यप्रणाली की जानकारी जुटाई जा रही है।

अब तक जांच में 70 फर्जी पासपोर्ट बरामद किए जाने की बात सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में पासपोर्ट भोपाल के पते पर बनाए गए बताए जा रहे हैं।

डेढ़ साल तक फर्जी पहचान से भोपाल में रहा मुख्य आरोपी

STF की जांच के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी रियाल चौधरी भोपाल के अन्नानगर इलाके में करीब डेढ़ साल तक कथित तौर पर फर्जी पहचान के साथ रहा था।

जांच में सामने आया है कि गिरोह कथित रूप से फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के लिए 25 से 30 हजार रुपये तक वसूलता था। STF को सत्यापन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की भी जानकारी मिली है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, पुलिस, नगर निगम और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सत्यापन के अलग-अलग चरणों में कथित तौर पर रकम तय होने की बात सामने आई है।

10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों से पूछताछ की तैयारी

STF अब उन 10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर पर्याप्त जांच के बिना सत्यापन रिपोर्ट को मंजूरी दी थी।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही किस स्तर पर हुई और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका रही।

कैफे संचालक और केयरटेकर हिरासत में

मामले में STF ने फिलहाल एक कैफे संचालक और रियाल चौधरी के केयरटेकर को हिरासत में लिया है। दोनों से नेटवर्क से जुड़े संपर्कों और गतिविधियों को लेकर पूछताछ की जा रही है।

STF के मुताबिक, रियाल चौधरी ने स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों के नाम पर कथित तौर पर 5 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का चंदा भी जुटाया था। इस रकम के स्रोत और इस्तेमाल को लेकर भी जांच की जा रही है।

विदेशी फंडिंग एंगल की भी जांच

अब तक STF इस मामले में 4 मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। जांच एजेंसी कथित फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के साथ किसी संभावित विदेशी फंडिंग कनेक्शन की भी जांच कर रही है।

फिलहाल STF की जांच जारी है। हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने की पूरी प्रक्रिया को लेकर और जानकारी सामने आने की संभावना है।

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