September 15, 2026

आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में खनिज नीलामी और जमीन अधिग्रहण से प्रभावित आदिवासी किसानों के अधिकारों को लेकर सियासत तेज हो गई है। जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने प्रभावित ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं और जमीन से जुड़े मामलों को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाने का ऐलान किया।

विधायक कार्यालय में बैठक के बाद चंद्रशेखर आजाद नगर के डाक बंगले में भी ग्रामीणों से चर्चा की गई। इस दौरान प्रभावित किसानों ने अपनी चिंताएं और सुझाव सामने रखे।

‘आदिवासी समाज की एक इंच जमीन भी नहीं जाने देंगे’

सेना महेश पटेल ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं है, बल्कि यह उनकी पहचान, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी है। इसलिए जमीन से जुड़े किसी भी फैसले में ग्रामीणों की राय और उनके अधिकारों का सम्मान जरूरी है।

उन्होंने कहा कि खनिज नीलामी से प्रभावित किसानों की जमीन का मुद्दा आगामी विधानसभा सत्र में उठाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो आदिवासी विधायकों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की रणनीति भी तैयार की जाएगी।

विधायक ने कहा, “हम अपने आदिवासी समाज की जमीन की लड़ाई विधानसभा में भी लड़ेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर भी उतरेंगे। किसानों को डरने की जरूरत नहीं है।”

प्रभावित किसानों की जमीन पर सरकार दे लिखित जवाब

सेना महेश पटेल ने सरकार और भाजपा नेताओं से मांग की कि खनिज नीलामी से प्रभावित किसानों की जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस द्वारा उठाया जा रहा मुद्दा गलत है तो सरकार लिखित रूप से बताए कि नीलामी प्रक्रिया से किसानों की जमीन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की चिंता केवल राजनीतिक बयानबाजी से खत्म नहीं होगी। सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रभावित पंचायतों और किसानों की जमीन को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी और उनके अधिकारों की सुरक्षा किस तरह होगी।

बीजेपी के धरने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

जमीन के मुद्दे के साथ सेना महेश पटेल ने भाजपा नेताओं के अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने और ज्ञापन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं, वहीं नागर सिंह चौहान कैबिनेट मंत्री हैं, तो भाजपा नेताओं को अपनी ही सरकार के खिलाफ धरना क्यों देना पड़ रहा है?

उन्होंने सवाल किया कि “सरकार आपकी, मुख्यमंत्री आपके, कैबिनेट आपकी और प्रशासन भी आपकी सरकार का है, फिर धरना किसके खिलाफ और ज्ञापन किसको?”

विधायक ने कहा कि यदि किसानों को राहत दिलाने या जिले को सूखाग्रस्त घोषित कराने की मांग है तो मंत्री को यह प्रस्ताव कैबिनेट में रखना चाहिए और मुख्यमंत्री से निर्णय करवाना चाहिए।

‘मंत्री की सुनवाई नहीं तो आम जनता की कौन सुनेगा?’

आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने भी भाजपा नेताओं के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कैबिनेट मंत्री को अपनी ही सरकार के सामने धरना देना पड़ रहा है तो आम आदिवासी, किसान और गरीब की सुनवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने भाजपा नेताओं से कांग्रेस पर आरोप लगाने के बजाय अपनी ही सरकार से जवाब मांगने की अपील की।

25 अगस्त के प्रदर्शन का किया जिक्र

कांग्रेस नेताओं ने 25 अगस्त को बड़ी संख्या में ग्रामीणों के कलेक्टर कार्यालय पहुंचने का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि ग्रामीण पहले ही प्रशासन के सामने जमीन और अपने अधिकारों से जुड़ी चिंताएं रख चुके हैं।

सेना महेश पटेल ने कहा कि ग्रामीणों की आवाज को केवल राजनीतिक बयान मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रभावित गांवों में जनसंवाद और रायशुमारी के माध्यम से लोगों की वास्तविक स्थिति को समझा जाएगा।

आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री की जांच की मांग

विधायक ने आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी की। उन्होंने कहा कि संदिग्ध परिस्थितियों में हुई जमीनों की खरीद-बिक्री और संबंधित दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कांग्रेस इस मामले को प्रशासन से लेकर न्यायालय तक ले जाएगी और किसानों के अधिकारों की कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।

विधानसभा से सड़क तक संघर्ष का ऐलान

सेना महेश पटेल ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में जमीन के स्वामित्व, खनिज नीलामी और प्रभावित गांवों के किसानों के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने ग्रामीणों की मांगों और जमीन से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

विधायक ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के सवाल पर वे पीछे नहीं हटेंगी। प्रभावित गांवों के ग्रामीणों की आवाज गांव से लेकर विधानसभा तक उठाई जाएगी और जरूरत पड़ने पर सड़क पर भी लोकतांत्रिक संघर्ष किया जाएगा।

बैठकों में जोबट, उदयगढ़ और चंद्रशेखर आजाद नगर क्षेत्र के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। कांग्रेस ने रायशुमारी के बाद प्रभावित गांवों में जनसंवाद बढ़ाने और आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही।

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