ग्वालियर। गांधी जयंती पर जहां देशभर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों, आदर्शों और स्वच्छता के संदेश को याद किया जा रहा है, वहीं ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल परिसर से सामने आई तस्वीरें व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा एक बंद हॉल में ताले के पीछे है। प्रतिमा पर मकड़ी के जाले जमा हैं, वहां तक पहुंचने वाला रास्ता कचरे से भरा है और आसपास का परिसर भी बदहाल नजर आ रहा है।

ताले में बंद प्रतिमा, आसपास गंदगी और कचरे का ढेर
जयारोग्य अस्पताल की पुरानी पत्थर वाली इमारत में स्थित हॉल लंबे समय से बंद बताया जा रहा है। परिसर की तस्वीरों में प्रतिमा के आसपास धूल, गंदगी और कचरा दिखाई दे रहा है। वहां शराब की एक बोतल भी पड़ी नजर आती है। प्रतिमा पर मकड़ी के जाले जमा होने और आसपास साफ-सफाई की कमी से इस हिस्से की अनदेखी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता और सेवा के संदेश के बीच सामने आई इन तस्वीरों ने अस्पताल परिसर में रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
1899 में सिंधिया राजवंश ने कराया था भवन का निर्माण
जयारोग्य अस्पताल की पुरानी इमारत का ऐतिहासिक महत्व भी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1899 में सिंधिया राजवंश ने इस भवन का निर्माण कराया था। बाद में यहां अस्पताल संचालित हुआ, जहां आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों का इलाज किया जाता था।
समय के साथ कंपू रोड पर हजार बिस्तरों वाला अस्पताल बनने के बाद पुरानी इमारत से अलग-अलग विभागों को स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद इस ऐतिहासिक भवन में संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था।
हालांकि, प्रस्ताव के बावजूद भवन की मौजूदा स्थिति देखरेख की कमी की ओर इशारा करती है। इमारत का एक हिस्सा जर्जर होता जा रहा है और इसी परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा भी बंद हॉल के भीतर रखी हुई है।
स्वच्छता और सेवा के संदेश के बीच उठे सवाल
महात्मा गांधी ने स्वच्छता और सेवा को अपने जीवन में विशेष महत्व दिया था। ऐसे में उनकी प्रतिमा के आसपास गंदगी, कचरा और मकड़ी के जाले दिखाई देना व्यवस्था के लिए सवाल खड़े करता है।
गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों में उनके विचारों को याद करने के साथ ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक परिसरों की देखभाल भी जरूरी है। जयारोग्य अस्पताल की पुरानी इमारत की स्थिति इस बात की ओर ध्यान दिलाती है कि विरासत के संरक्षण और नियमित साफ-सफाई के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
बदहाल विरासत की सुध कब लेंगे जिम्मेदार?
पुरानी इमारत में संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव और उसके ऐतिहासिक महत्व के बावजूद परिसर की मौजूदा स्थिति चिंता का विषय है। अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग बंद हॉल, महात्मा गांधी की प्रतिमा और भवन की देखरेख के लिए कब कदम उठाएगा।
गांधी जयंती पर सामने आई ये तस्वीरें सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और राष्ट्रपिता की प्रतिमा के उचित रखरखाव की जरूरत को रेखांकित करती हैं।