September 15, 2026

रायपुर। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ में नए आपराधिक कानूनों के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। इसके लिए कानून में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।

नवा रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (NCLI) डैशबोर्ड की रिपोर्ट की समीक्षा की। उन्होंने डैशबोर्ड के विभिन्न मापदंडों पर छत्तीसगढ़ की स्थिति पर संतोष जताते हुए राज्य की रैंकिंग में और सुधार के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

जुलाई से राज्य की रैंकिंग में हुआ सुधार

बैठक में NCLI डैशबोर्ड के प्रत्येक मापदंड की बिंदुवार समीक्षा की गई। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि लगातार किए जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप जुलाई माह से छत्तीसगढ़ की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने अधिकारियों को सभी मापदंडों पर प्रदर्शन बेहतर करने और सुधार की गति को बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि केवल तकनीकी व्यवस्था विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी उपयोग मैदानी स्तर पर भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

FIR से कोर्ट तक प्रक्रिया होगी तेज

कार्यात्मक दक्षता के मुद्दे पर गृह मंत्री ने FIR और चार्जशीट को सीधे न्यायालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य विवेचना से लेकर न्यायालय में विचारण तक लगने वाले समय को कम करना है।

उन्होंने सभी थानों को नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और ई-साक्ष्य के उपयोग के लिए तकनीकी एवं कार्यात्मक रूप से तैयार करने को कहा।

विजय शर्मा ने ई-समन जारी होने के बाद उसकी तामील जल्द सुनिश्चित करने तथा निर्धारित समय-सीमा में चार्जशीट ऑनलाइन माध्यम से न्यायालय में प्रस्तुत करने की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी दिए।

लंबित अधिसूचनाएं जल्द जारी करने के निर्देश

गृह मंत्री ने प्रशासनिक सुधार के तहत जरूरी अधिसूचनाओं और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाओं को जल्द पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाना भी जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कानूनों में किए गए बदलावों का वास्तविक लाभ तभी नागरिकों तक पहुंचेगा, जब तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन हो।

CCTNS और ICJS की भी हुई समीक्षा

बैठक में नए आपराधिक कानूनों के साथ CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) तथा Inter-Operable Criminal Justice System (ICJS) के क्रियान्वयन में आ रही राज्य स्तरीय कठिनाइयों पर भी चर्चा हुई।

गृह मंत्री ने BPR&D, NCRB और NIC के अधिकारियों के साथ तकनीकी और प्रक्रियात्मक समस्याओं के समाधान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में केंद्रीय स्तर से तकनीकी सहयोग या समाधान की जरूरत है, उनमें संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर जल्द निराकरण कराया जाए।

NCLI डैशबोर्ड क्या है?

नेशनल क्रिमिनल लॉ इम्प्लीमेंटेशन (NCLI) डैशबोर्ड केंद्रीय गृह मंत्रालय का डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके माध्यम से देशभर में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों—

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS)
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)

के क्रियान्वयन की प्रगति की निगरानी की जाती है।

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में NCRB के महानिदेशक अमित गर्ग, BPR&D के महानिदेशक आलोक मित्तल, गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, गृह सचिव नेहा चंपावत एवं हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता, संचालक अभियोजन प्रदीप गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा और CAPT भोपाल के अनिल किशोर यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागीय पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मेडिको-लीगल नोडल अधिकारी और अभियोजन अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। दिल्ली से NCRB और NIC के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े।

गृह मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़े सभी तकनीकी, प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कार्यों को तय समयसीमा में पूरा किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ की स्थिति और बेहतर हो सके।

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