
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम की रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई अब निजी स्कूलों तक पहुंच गई है। नगर निगम ने शहर के कई निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे रिहायशी क्षेत्र में स्कूल का संचालन किस आधार पर कर रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद स्कूल संचालकों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
21 जोन में सर्वे, स्कूल संचालकों की बढ़ी चिंता
नगर निगम की टीमें शहर के 21 जोन में सर्वे कर रही हैं। रिहायशी क्षेत्रों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को लेकर अब तक हजारों प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसी क्रम में कई निजी स्कूल भी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं।
स्कूल संचालकों का कहना है कि यदि इन संस्थानों को बंद करने की कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर लाखों बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। साथ ही हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
स्कूल संचालकों ने सरकार से मांगी राहत
प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच के मोनू तोमर ने कहा कि स्कूलों को नोटिस दिए जा रहे हैं और इस मुद्दे को लेकर मंत्री से भी मुलाकात की गई है। उनका सवाल है कि यदि स्कूल बंद होते हैं तो इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की वैकल्पिक व्यवस्था कैसे होगी।
संचालकों का कहना है कि अचानक स्कूल बंद होने से बच्चों और अभिभावकों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी।
अभिभावकों ने भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की
निजी स्कूलों को नोटिस दिए जाने से अभिभावक भी चिंतित हैं। अभिभावक विवेक शुक्ला ने कहा कि नगर निगम की कार्रवाई में मानवीय दृष्टिकोण भी रखा जाना चाहिए। उन्होंने छोटे स्कूलों को राहत देने की मांग की, ताकि बच्चों को घर के आसपास शिक्षा की सुविधा मिलती रहे।
अब मामला नियमों के पालन और बच्चों की शिक्षा के बीच संतुलन का बन गया है। एक ओर नगर निगम के सामने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर स्कूल बंद होने की स्थिति में विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की नजर है।