November 8, 2026

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में 1 लाख 86 हजार 600 रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कमीशन का लालच देकर बैंक खाते हासिल किए और उनमें ठगी की रकम मंगवाकर उसे निकालने तथा आगे ट्रांसफर करने का काम किया। एडिशनल एसपी रूपेश कुमार दांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस की जांच उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक पहुंची, जहां से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

बैंक खातों के जरिए चल रहा था ठगी का खेल

पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी की रकम को दूसरे लोगों के बैंक खातों में मंगवाया जाता था। इसके लिए खाताधारकों को कमीशन देने का लालच दिया जाता था। एक आरोपी बैंक से रकम निकालकर 10 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखता था, जबकि दूसरा आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम को भारतीय मुद्रा से डॉलर में बदलने का काम करता था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब गातापार थाना क्षेत्र निवासी राकेश कुमार भोक्ते ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों से अलग-अलग तारीखों में कुल 1 लाख 86 हजार 600 रुपये निकाल लिए गए हैं।

तीन बैंक खातों से निकाले गए थे 1.86 लाख रुपये

शिकायत के अनुसार, 16 अगस्त 2026 को राकेश कुमार भोक्ते के IDBI बैंक, दाउचौरा खैरागढ़ स्थित खाते से 99 हजार रुपये और उनकी पत्नी सावित्री बाई भोक्ते के छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, पाड़ादाह शाखा स्थित खाते से 80 हजार रुपये निकाल लिए गए।

इसके बाद 1 सितंबर 2026 को HDFC बैंक, खैरागढ़ स्थित खाते से भी 7,600 रुपये निकाल लिए गए। शिकायत के आधार पर थाना खैरागढ़ में अपराध क्रमांक 338/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D के अंतर्गत मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।

उत्तराखंड से मिला बैंक खातों का सुराग

जांच के दौरान पुलिस को बैंक केवाईसी समन्वय पोर्टल से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस टीम उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के झनकईया थाना क्षेत्र पहुंची। यहां तारादेवी से पूछताछ की गई।

पुलिस के मुताबिक, तारादेवी ने बताया कि उज्जवल सिंह दानू ने जून 2026 में उनके बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 5 हजार रुपये देने का लालच दिया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक और यूनियन बैंक के खाते एटीएम कार्ड सहित उसे सौंप दिए।

पुलिस ने तारादेवी के कब्जे से दोनों बैंकों की पासबुक और सैमसंग कंपनी का एक मोबाइल फोन जब्त किया। उन्हें नोटिस देकर जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए और सुपुर्दनामा पर छोड़ा गया।

10 प्रतिशत कमीशन लेकर निकालता था ठगी की रकम

इसके बाद पुलिस ने उज्जवल सिंह दानू से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, उसने बताया कि बैंक खाते में रकम आने का मैसेज मिलने के बाद वह बैंक जाकर पैसे निकालता था। निकाली गई रकम में से 10 प्रतिशत कमीशन अपने पास रखता और बाकी पैसे सतविंदर सिंह को सौंप देता था।

पुलिस ने उज्जवल के कब्जे से कमीशन के रूप में प्राप्त 10 हजार रुपये नकद और पंजाब एंड सिंध बैंक की जमा पावती की छायाप्रति जब्त की। अपराध से संबंधित साक्ष्य मिलने के बाद उसे 17 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया।

दिल्ली से सतविंदर सिंह गिरफ्तार, डॉलर में बदलता था रकम

मामले की अगली कड़ी में पुलिस टीम दिल्ली पहुंची, जहां से 27 वर्षीय सतविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सतविंदर ने कथित तौर पर ठगी से प्राप्त भारतीय मुद्रा को डॉलर में बदलने की बात स्वीकार की। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया।

पुलिस ने सतविंदर को 18 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया। इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड लिया गया। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। मामले की विवेचना अभी जारी है।

कमीशन के लालच में बैंक खाता देना पड़ सकता है भारी

इस मामले ने एक बार फिर बैंक खातों के दुरुपयोग और साइबर अपराध में उनकी भूमिका को उजागर किया है। साइबर अपराधी अक्सर कमीशन का लालच देकर दूसरे लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड और बैंकिंग सुविधाएं हासिल करते हैं। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।

ध्यान रखें कि अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने देना आपको भी कानूनी और पुलिस जांच के दायरे में ला सकता है। इसलिए किसी के कहने पर अपने खाते में रकम प्राप्त न करें और न ही उसे निकालकर किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपें।

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत

अगर आपके बैंक खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाते हैं, तो तत्काल बैंक को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।

बैंक ट्रांजेक्शन के मैसेज, स्टेटमेंट और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित रखें। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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