उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में शनिचरी अमावस्या और सर्वपितृ अमावस्या के विशेष संयोग पर श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। इंदौर रोड स्थित प्रसिद्ध शनि नवग्रह मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु शनिदेव की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। वहीं, सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कर्म भी कर रहे हैं।

शनि पूजा और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिचरी अमावस्या पर शनिदेव की पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। वहीं, सर्वपितृ अमावस्या को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष दिन माना जाता है।
इस अवसर पर पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा है। मान्यता है कि जिन लोगों को पितृपक्ष के दौरान अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने का अवसर नहीं मिल पाता, वे सर्वपितृ अमावस्या पर भी श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
दोनों अमावस्याओं का संयोग होने से श्रद्धालु शनिदेव की आराधना के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण भी कर रहे हैं।
शनि नवग्रह मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़
उज्जैन की धार्मिक परंपराओं में शिप्रा नदी, त्रिवेणी संगम और नवग्रह शनि मंदिर का विशेष स्थान है। अमावस्या के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं।
इंदौर रोड स्थित शनि नवग्रह मंदिर में सुबह से भक्तों का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालु शनिदेव के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ शिप्रा नदी में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। लोग अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना भी कर रहे हैं।
शिप्रा में स्नान के लिए प्रशासन ने किए इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाएं की हैं। शिप्रा नदी में पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए नर्मदा का पानी शिप्रा में छोड़ा गया है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।
अमावस्या के अवसर पर धार्मिक स्थलों और स्नान क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के इंतजाम किए हैं।
आस्था के साथ पूर्वजों को याद करने का अवसर
शनिचरी अमावस्या जहां शनिदेव की आराधना से जुड़ी है, वहीं सर्वपितृ अमावस्या पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर मानी जाती है। उज्जैन में इस विशेष संयोग पर श्रद्धालु पूजा, स्नान, तर्पण और दान-पुण्य के माध्यम से अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं।