यह लेख विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित “सुशासन तिहार” और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता की कहानियों पर केंद्रित है। इसका सारांश इस प्रकार है:
प्रमुख बिंदु
- छत्तीसगढ़ में आयोजित सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार सीधे लोगों तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने और योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास कर रही है।
- तालापारा और हेमुनगर में आयोजित समाधान शिविरों में कई हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला।

ज्योति मिरी की कहानी
- ज्योति मिरी वर्षों से सब्ज़ी विक्रेता के रूप में कार्य कर रही थीं, लेकिन पूंजी की कमी के कारण व्यवसाय का विस्तार नहीं कर पा रही थीं।
- उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत आर्थिक सहायता मिली।
- सहायता मिलने के बाद वे अधिक मात्रा में सामान खरीदकर अपना व्यवसाय बढ़ाने में सक्षम हुई हैं।
अपर्णा डे की कहानी
- अपर्णा डे घर से सिलाई कार्य संचालित करती थीं।
- संसाधनों और मशीनों की कमी के कारण उन्हें कई अवसर छोड़ने पड़ते थे।
- स्वनिधि योजना से मिली सहायता के बाद वे अपने सिलाई सेंटर का विस्तार करने और नई मशीनें खरीदने की तैयारी कर रही हैं।
दिव्यांगजनों को सहायता
- हेमुनगर के समाधान शिविर में 80 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरित की गई।
- इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों की स्वतंत्रता, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
वीणा सिंह
- वीणा सिंह को नौकरी पर जाने और दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
- ट्राईसाइकिल मिलने के बाद वे स्वतंत्र रूप से आवागमन कर पा रही हैं।
राजीन कुर्रे
- राजीन कुर्रे सिलाई कार्य से अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं।
- ट्राईसाइकिल मिलने से उनके व्यवसाय के लिए सामग्री लाना और कामकाज करना आसान हो गया है।
सतरूपा बंजारे
- सतरूपा बंजारे को स्कूल आने-जाने में कठिनाई होती थी।
- ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनकी शिक्षा तक पहुंच आसान हो गई है और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रही हैं।