मध्य प्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लेने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। सभी कार्यकर्ताओं के सुरक्षित घर पहुंच जाने के बाद अदालत ने इस मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अल्पेश कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने की।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी के 16 कार्यकर्ता जा रहे थे। इनमें चार युवतियां और 12 युवक शामिल थे।
आरोप है कि सभी के पास वैध रेल टिकट होने के बावजूद उन्हें इटारसी रेलवे स्टेशन पर गोवा एक्सप्रेस से जबरन उतार दिया गया और हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में शुरू की थी भूख हड़ताल
कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लिए जाने के विरोध में भूख हड़ताल भी शुरू की गई थी। मामले को लेकर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई, जिसमें हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को अदालत के समक्ष पेश करने या उनकी रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।
इससे पहले हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए थे कि प्रदर्शनकारियों को अदालत में पेश किया जाए या उन्हें रिहा किया जाए।
सुरक्षित घर पहुंचने के बाद याचिका खारिज
मामले की सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि सभी 16 कार्यकर्ता सुरक्षित अपने घर पहुंच चुके हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
इस फैसले के साथ कार्यकर्ताओं को ट्रेन से उतारकर हिरासत में लेने से जुड़ी याचिका का निपटारा हो गया। हालांकि, याचिका खारिज होने को पुलिस की कार्रवाई पर अदालत की ओर से दी गई क्लीन चिट नहीं माना जाना चाहिए; उपलब्ध जानकारी में इस संबंध में अदालत की ऐसी कोई टिप्पणी नहीं बताई गई है।