बिलासपुर। जूनियर इंजीनियर भर्ती से जुड़े एक मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और चयनित अभ्यर्थियों के कार्यभार संभालने के बाद यदि कोई अभ्यर्थी इस्तीफा देता है और पद रिक्त होता है, तो उस पद को पुरानी चयन सूची या प्रतीक्षा सूची से नहीं भरा जा सकता।
जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मामले से जुड़ी दो याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि जॉइनिंग के बाद इस्तीफे से खाली हुआ पद ‘फ्रेश वैकेंसी’ माना जाएगा। ऐसे पद को भरने के लिए विभाग को नया विज्ञापन जारी कर नए सिरे से चयन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
जूनियर इंजीनियर के पदों पर हुई थी भर्ती
मामला स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के पदों पर भर्ती से जुड़ा है।
OBC वर्ग के तहत भर्ती के लिए 15 सितंबर 2023 को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद 23 और 24 अक्टूबर 2024 को चयन सूची जारी की गई। इस चयन सूची में भूपेश वर्मा और विकास कुमार गुप्ता का चयन नहीं हो सका था।
चयनित अभ्यर्थियों के इस्तीफे से खाली हुए पद
चयन सूची जारी होने के बाद कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने विभाग में जॉइनिंग करने के बाद इस्तीफा दे दिया। इससे जूनियर इंजीनियर के कई पद रिक्त हो गए।
इसके बाद भूपेश वर्मा और विकास कुमार गुप्ता ने विभाग के समक्ष आवेदन देकर इन रिक्त पदों पर वेटिंग लिस्ट के आधार पर नियुक्ति देने की मांग की। जब उनके आवेदन पर विचार नहीं हुआ, तो दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ताओं ने वेटिंग लिस्ट जारी करने की मांग की
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि विभाग की परंपरा के अनुसार पहली वेटिंग लिस्ट अथवा फेज-2 सूची जारी की जानी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि RTI के तहत जानकारी मांगने के बावजूद इस संबंध में कार्रवाई नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उपलब्ध रिक्त पदों पर वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों को मौका नहीं देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
याचिका में हाईकोर्ट से विभाग को पहली वेटिंग लिस्ट/फेज-2 सूची जारी करने और उपलब्ध रिक्तियों पर दोनों याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुदेश कुमार गोयल बनाम हरियाणा राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि चयनित अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति ग्रहण करता है और बाद में इस्तीफा दे देता है, तो उसके कारण खाली हुआ पद पिछली चयन प्रक्रिया की रिक्ति नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में वह नई या फ्रेश वैकेंसी होती है।
कोर्ट के अनुसार, ऐसी रिक्ति को पुरानी चयन सूची या प्रतीक्षा सूची के जरिए भरने के बजाय नए विज्ञापन के माध्यम से नई चयन प्रक्रिया आयोजित करनी होगी।
इसी आधार पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।